रामोत्सव-2026 में पंचवटी से सीता हरण और जटायु प्रसंग का सजीव मंचन, शनिवार को पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से दिखेंगे रामलीला के दृश्य
लखनऊ। राजधानी की ऐतिहासिक ऐशबाग रामलीला में आयोजित रामोत्सव-2026 के मंच पर शुक्रवार को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। वनवास के दौरान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के पंचवटी पहुंचने से लेकर रावण द्वारा माता सीता के हरण, जटायु के संघर्ष और अशोक वाटिका में सीता-मंदोदरी संवाद तक की घटनाओं ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से रामायण के इन प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
शुक्रवार के मंचन की शुरुआत श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास के प्रसंग से हुई। वन यात्रा के दौरान तीनों भारद्वाज ऋषि के आश्रम पहुंचे, जहां ऋषि ने उन्हें चित्रकूट जाने का सुझाव दिया। इसके बाद श्रीराम अत्रि मुनि के आश्रम पहुंचे। यहां माता सीता को देवी अनुसूया ने दिव्य वस्त्र और श्रृंगार सामग्री प्रदान की तथा उन्हें पतिव्रत धर्म के गुणों और आदर्शों का ज्ञान दिया।

आश्रम के प्रसंग के बाद श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण गोदावरी नदी के तट पर स्थित पंचवटी पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी कुटिया बनाई और वनवास के दिन व्यतीत करने लगे। इसी दौरान लंका के राजा रावण की बहन सूर्पनखा का प्रवेश होता है, जो श्रीराम के रूप और व्यक्तित्व से मोहित होकर उन्हें आकर्षित करने का प्रयास करती है।
श्रीराम ने मर्यादा और अपने एक पत्नीव्रत धर्म का उल्लेख करते हुए सूर्पनखा के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इससे क्रोधित होकर सूर्पनखा माता सीता पर हमला करने का प्रयास करती है। इस पर लक्ष्मण उसकी नाक काट देते हैं। अपमानित और आक्रोशित सूर्पनखा अपने भाई रावण के दरबार में पहुंचती है और पूरी घटना बताकर उसे सीता हरण के लिए उकसाती है।

स्वर्ण मृग के मोह में श्रीराम के पीछे गईं माता सीता
सूर्पनखा की बात सुनकर रावण क्रोधित हो उठता है और माता सीता के हरण की योजना बनाने लगता है। इस षड्यंत्र को अंजाम देने के लिए वह अपने मामा मायावी मारीच की सहायता लेता है। मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण कर पंचवटी पहुंचता है। सुनहरे मृग की सुंदरता देखकर माता सीता उसे पाने की इच्छा व्यक्त करती हैं और श्रीराम से उसे लाने का आग्रह करती हैं।
माता सीता की इच्छा पूरी करने के लिए श्रीराम स्वर्ण मृग के पीछे वन में चले जाते हैं। काफी समय तक उनके वापस नहीं लौटने पर माता सीता चिंतित हो उठती हैं और लक्ष्मण से श्रीराम की खोज में जाने का आग्रह करती हैं। इसके बाद लक्ष्मण कुटिया के बाहर सुरक्षा रेखा खींचकर माता सीता से उसे पार न करने की विनती करते हैं और अपने बड़े भाई की खोज में निकल जाते हैं।

इसी अवसर का लाभ उठाकर रावण साधु का वेश धारण कर कुटिया के बाहर पहुंचता है और भिक्षा मांगता है। लक्ष्मण रेखा के भीतर रहते हुए माता सीता भिक्षा देने में असमर्थ रहती हैं। रावण उन्हें रेखा पार कर भिक्षा देने के लिए विवश करता है। जैसे ही माता सीता सुरक्षा रेखा पार करती हैं, रावण अपना वास्तविक रूप प्रकट कर उनका हरण कर लेता है।
रावण माता सीता को पुष्पक विमान से लंका की ओर ले जाने लगता है। रास्ते में पक्षीराज जटायु उसे रोकने का प्रयास करते हैं। जटायु रावण से संघर्ष कर माता सीता को बचाने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन रावण के प्रहारों से घायल होकर वे धरती पर गिर पड़ते हैं। इसके बाद रावण माता सीता को लेकर लंका पहुंच जाता है।
जटायु से सीता हरण का समाचार सुन व्याकुल हुए श्रीराम
जब श्रीराम और लक्ष्मण पंचवटी लौटते हैं, तो कुटिया में माता सीता को न पाकर व्याकुल हो उठते हैं। दोनों वन में उन्हें खोजने निकल पड़ते हैं। माता सीता की तलाश के दौरान उनकी भेंट घायल जटायु से होती है। जटायु राजा दशरथ के मित्र थे। वे अपनी अंतिम सांसों से पहले श्रीराम को रावण द्वारा माता सीता के हरण की पूरी घटना बताते हैं।
जटायु से सीता हरण का समाचार सुनकर श्रीराम दुखी हो जाते हैं। जटायु के त्याग और संघर्ष को सम्मान देते हुए श्रीराम उनका अंतिम संस्कार करते हैं और माता सीता की खोज में आगे बढ़ते हैं। इस प्रसंग ने दर्शकों के सामने निष्ठा, साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण का संदेश प्रस्तुत किया।
इसके बाद मंच पर लंका का दृश्य दिखाया गया। रावण माता सीता को अशोक वाटिका में राक्षसियों के पहरे के बीच बंधक बनाकर रखता है और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास करता है। इसी बीच महारानी मंदोदरी अशोक वाटिका पहुंचती हैं। माता सीता और मंदोदरी के बीच भावनात्मक संवाद के साथ शुक्रवार की रामलीला का मंचन संपन्न हुआ।

मंचन से पहले सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
रामलीला के मुख्य मंचन से पहले सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। घुंघरू नृत्य संगम डांस एकेडमी के कलाकारों ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। इसके बाद प्रिया चंद्र के निर्देशन में अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। कलाकारों ने अपनी प्रतिभा और आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भर दिए।
ऐशबाग रामलीला की परंपरा के अनुसार मंचन शुरू होने से पहले मंत्रोच्चार किया जाता है और श्रीराम दरबार के विग्रह का विधिवत पूजन होता है। लीला के समापन के बाद प्रतिदिन श्रीराम दरबार के विग्रह की आरती की जाती है और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है। शुक्रवार को भी मंचन के बाद आरती-पूजन और प्रसाद वितरण किया गया।

शनिवार से पहली बार AI तकनीक से दिखेंगे रामलीला के दृश्य
ऐशबाग श्रीरामलीला समिति के अध्यक्ष हरीशचंद्र अग्रवाल ने बताया कि शनिवार से रामलीला के मंचन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। उनके अनुसार, रामलीला में दृश्यों को प्रस्तुत करने के लिए इस तकनीक का प्रयोग पहली बार किया जा रहा है। इससे मंचन को और आकर्षक बनाने तथा दर्शकों को नए अनुभव से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि शनिवार के मंचन में श्रीराम की अपनी परम भक्त शबरी और प्रिय भक्त हनुमान से भेंट के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही सुग्रीव मिलन, बालि वध तथा अंगद और तारा के संवाद से जुड़ी लीलाओं का मंचन भी किया जाएगा।
हरीशचंद्र अग्रवाल ने कहा कि श्रीराम का जीवन समाज को आदर्श, मर्यादा और कर्तव्य की शिक्षा देता है। ऐशबाग श्रीरामलीला समिति का प्रयास है कि समाज की पहली सीढ़ी से लेकर अंतिम पायदान पर खड़े प्रत्येक व्यक्ति को श्रीराम के जीवन मूल्यों और शिक्षाओं से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि समिति इस उद्देश्य को लेकर निरंतर प्रयास करती रहेगी।
ऐशबाग की ऐतिहासिक रामलीला में धार्मिक प्रसंगों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आधुनिक तकनीक के समावेश का प्रयास रामोत्सव को विशेष बना रहा है। शनिवार को एआई तकनीक से होने वाला मंचन भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहने की उम्मीद है।





