सनातन की जड़ों पर चोट या बदलते समय की आहट? गाँव की चौपाल से उठता एक सवाल

बदलते समय के बीच सनातन संस्कृति और परंपराओं को लेकर उठते सवालों पर यह विचार लेख सुधार और अपनी जड़ों से दूरी के बीच अंतर को रेखांकित करता है। आधुनिकता को अपनाते हुए अपनी संस्कृति, परिवार, संस्कार और अगली पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़कर रखने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

भाषा की दीवार या भारत की एकता ?  सवाल महाराष्ट्र से आगे का है !

गाँव में एक कहावत है—“घर का आदमी घर में ही पराया हो जाए, तो समझो चौखट कुछ ज्यादा ही ऊँची कर दी गई है।” आज […]

वर्दी के नीचे की आवाज़: साहब की कुर्सी और सिपाही की चुप्पी

पुलिस विभाग में अनुशासन जरूरी है, लेकिन क्या सिपाही अपनी शिकायत बिना डर के ऊपर तक पहुंचा सकता है? ‘वर्दी के नीचे की आवाज़’ में इसी सवाल के जरिए अधिकारी की कुर्सी और सिपाही की चुप्पी के बीच की हकीकत को समझने की कोशिश।