लखनऊ, 9 अक्टूबर 2026। उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ में MOOCs एवं SWAYAM पाठ्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। शुक्रवार को एजुकेशनल मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर (मीडिया सेंटर) की ओर से स्कूल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन में आयोजित इस कार्यशाला में ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालय की नियमित शैक्षणिक व्यवस्था से जोड़ने, क्रेडिट ट्रांसफर और विद्यार्थियों के कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. यू.वी. किरण उपस्थित रहीं। वहीं मीडिया सेंटर के निदेशक एवं स्कूल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन के संकायाध्यक्ष प्रो. गोपाल सिंह की भी प्रमुख उपस्थिति रही। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों और संबंधित शैक्षणिक कर्मियों को MOOCs एवं SWAYAM पाठ्यक्रमों की प्रक्रिया, उपयोगिता और विश्वविद्यालय स्तर पर उनके व्यवस्थित संचालन की जानकारी देना था।
क्या हैं MOOCs और SWAYAM, उच्च शिक्षा में कैसे होंगे उपयोगी?
कार्यशाला में मुख्य वक्ता प्रो. यू.वी. किरण ने MOOCs यानी Massive Open Online Courses तथा SWAYAM प्लेटफॉर्म से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में शामिल करके विद्यार्थियों को अपनी रुचि, जरूरत और शैक्षणिक लक्ष्य के अनुरूप अतिरिक्त ज्ञान एवं कौशल हासिल करने के अवसर दिए जा सकते हैं।
MOOCs के माध्यम से विद्यार्थी विभिन्न विषयों की ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और पाठ्यक्रमों तक पहुंच बना सकते हैं। वहीं SWAYAM जैसे प्लेटफॉर्म का व्यवस्थित उपयोग उच्च शिक्षा में डिजिटल शिक्षण के अवसरों को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। इससे विद्यार्थियों को अपने नियमित पाठ्यक्रम के अतिरिक्त विषयों को सीखने और अपनी शैक्षणिक दक्षता विकसित करने का अवसर मिलता है।

क्रेडिट प्रणाली और ट्रांसफर की प्रक्रिया पर दिया गया जोर
कार्यशाला के दौरान ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालय के नियमित पाठ्यक्रमों के साथ समायोजित करने की प्रक्रिया पर विशेष चर्चा हुई। प्रो. यू.वी. किरण ने पाठ्यक्रमों के चयन, विद्यार्थियों के पंजीकरण, क्रेडिट प्रणाली, क्रेडिट ट्रांसफर और अर्जित शैक्षणिक क्रेडिट को नियमित पढ़ाई के साथ जोड़ने से संबंधित विभिन्न पहलुओं को समझाया।
उन्होंने बताया कि MOOCs एवं SWAYAM पाठ्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय के संबंधित विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है। इसके साथ ही संकाय सदस्यों की भूमिका, विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने, मूल्यांकन और प्रमाणन की प्रक्रिया पर भी ध्यान देना होगा।
विश्वविद्यालय स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देशों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप इन पाठ्यक्रमों का संचालन विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा का बेहतर लाभ दिलाने में मदद कर सकता है। इससे पारंपरिक कक्षा शिक्षण के साथ डिजिटल माध्यमों से सीखने के विकल्पों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
MOOCs के विकास और संचालन में शिक्षकों की भूमिका अहम
कार्यशाला में मीडिया सेंटर के प्रोड्यूसर डॉ. निरंजन कुमार ने उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने में MOOCs की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संकाय सदस्य विद्यार्थियों को इन पाठ्यक्रमों के प्रति प्रोत्साहित करने के साथ-साथ इनके विकास और संचालन की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
डॉ. निरंजन कुमार ने पाठ्यक्रम निर्माण, अध्ययन सामग्री तैयार करने और ऑनलाइन शिक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि शिक्षक MOOCs के माध्यम से अपनी विशेषज्ञता और विषयगत ज्ञान को व्यापक स्तर पर विद्यार्थियों तक पहुंचाने के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय समन्वयक (National Coordinator) की भूमिका और उसके माध्यम से MOOCs पाठ्यक्रमों की कार्यप्रणाली, संचालन तथा संकाय सदस्यों की सहभागिता से जुड़ी प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की।
तकनीक आधारित शिक्षा से बढ़ेंगे ज्ञान और कौशल के अवसर
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि MOOCs एवं SWAYAM का व्यवस्थित उपयोग विद्यार्थियों को लचीली और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायक हो सकता है। ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुरूप विषयों का अध्ययन कर सकते हैं और अपने ज्ञान के दायरे को व्यापक बना सकते हैं।
डिजिटल शिक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी, उपयुक्त अध्ययन सामग्री, विभागीय समन्वय और मूल्यांकन प्रक्रिया का सुचारु संचालन महत्वपूर्ण है। इन सभी पहलुओं पर ध्यान देकर विश्वविद्यालयों में ऑनलाइन शिक्षा के उपयोग को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यशाला में प्रो. महेंद्र कुमार पाढ़ी, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. कुंवर सुरेन्द्र बहादुर और डॉ. लोकनाथ सिंह सहित विभिन्न शिक्षक उपस्थित रहे। मीडिया सेंटर की ओर से श्री आनंद असवाल, श्री अनुराग कुमार, श्री अभिलाष दास, श्री दुर्गेश मौर्य, श्री अनूप कुमार, श्री मयंक थपलियाल और श्री अरुण वर्मा ने भी सहभागिता की।
इसके अतिरिक्त शोधार्थियों और विद्यार्थियों की मौजूदगी रही। कार्यशाला के माध्यम से MOOCs एवं SWAYAM पाठ्यक्रमों के शैक्षणिक उपयोग, उनके संचालन और विश्वविद्यालय की नियमित शिक्षा के साथ समन्वय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की गई।




