लखनऊ, 10 अक्टूबर 2026। डिजिटल दौर में बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति विद्यार्थियों और युवाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से शनिवार को यूपी-112 मुख्यालय, लखनऊ में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह (NCSAM) अक्टूबर 2026 के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के करीब 450 विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, सोशल मीडिया फ्रॉड और डीपफेक वीडियो जैसे साइबर खतरों से बचाव के तरीके बताए गए।
साइबर क्राइम मुख्यालय और यूपी-112 मुख्यालय की संयुक्त टीम के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ पुलिस महानिदेशक विनोद कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक करना और ऑनलाइन धोखाधड़ी की पहचान करने के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध कराना था।

डिजिटल अरेस्ट से लेकर डीपफेक तक, साइबर कमांडो ने दी जानकारी
कार्यक्रम में दिल्ली पब्लिक स्कूल, एलनहाउस पब्लिक स्कूल और विज्ञान फाउंडेशन सहित विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। साइबर सेल की टीम के साइबर कमांडो ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध के बदलते तरीकों और उनसे जुड़े जोखिमों के बारे में जानकारी दी।
सत्र में डिजिटल अरेस्ट, ब्लैकमेलिंग, निवेश के नाम पर ठगी, गेमिंग एवं बेटिंग ऐप से जुड़े जोखिम, सोशल मीडिया धोखाधड़ी और डीपफेक वीडियो जैसे विषयों पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि साइबर अपराधी लोगों को डराकर, लालच देकर या भरोसे का फायदा उठाकर उनकी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
विशेषज्ञों ने समझाया कि अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गए संदेश, संदिग्ध लिंक, फर्जी निवेश योजनाएं और सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक सामग्री को बिना जांचे स्वीकार करना नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय सतर्कता बरतना जरूरी है।

OTP, UPI PIN और पासवर्ड किसी से साझा न करें
कार्यक्रम में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि वे अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध फाइल या ऐप डाउनलोड करने से बचें।
साथ ही, उन्हें बताया गया कि OTP, UPI PIN, पासवर्ड और बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। किसी व्यक्ति के पुलिस अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी अधिकारी होने का दावा करने मात्र से उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग के आधिकारिक माध्यम से पहचान और जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान एम-कवच-2 और TRAI DND ऐप के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। इन डिजिटल साधनों के जरिए मोबाइल सुरक्षा और अवांछित कॉल या संदेशों से संबंधित जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें कॉल
कार्यक्रम में आरक्षी सारिका सिंह ने विद्यार्थियों को साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए।
इसके अलावा, साइबर अपराध से संबंधित शिकायत आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर भी दर्ज कराई जा सकती है।
ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल शिकायत करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे संबंधित लेनदेन पर समय रहते कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है। विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि वे ऐसी घटना होने पर घबराने के बजाय उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखें और तुरंत आधिकारिक माध्यमों से शिकायत करें।

नुक्कड़ नाटक और क्विज से दिया जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम को संवादात्मक और रोचक बनाने के लिए साइबर अपराधों पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से ऑनलाइन ठगी के संभावित तरीकों और उनसे बचने के लिए जरूरी सावधानियों का संदेश दिया गया।
इसके साथ ही साइबर सुरक्षा पर आधारित क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता के माध्यम से साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी को रोचक तरीके से समझने और उसे व्यवहार में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यूपी-112 की कार्यप्रणाली और आपातकालीन सहायता सेवाओं के बारे में भी बताया गया, ताकि जरूरत पड़ने पर वे उपलब्ध सहायता का लाभ उठा सकें।
साइबर क्राइम और यूपी-112 के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर साइबर क्राइम मुख्यालय, उत्तर प्रदेश से पुलिस उपमहानिरीक्षक पवन कुमार, पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार यादव, प्रमोद कुमार और रोहन झा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
यूपी-112 मुख्यालय की ओर से पुलिस महानिरीक्षक डॉ. के. एजिलरसन, पुलिस अधीक्षक निधि सोनकर और पुलिस अधीक्षक हरेन्द्र कुमार यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं पत्रकार भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने की अपील
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना, सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देना और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपायों की जानकारी देना रहा।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने आमजन से इंटरनेट और सोशल मीडिया का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करने, अनजान लिंक से बचने तथा अपनी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की अपील की। पुलिस ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने या आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी।




