लखनऊ, 10 अक्टूबर 2026। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS), लखनऊ के एनेस्थिसियोलॉजी विभाग ने शनिवार को अपना 39वां स्थापना दिवस मनाया। संस्थान के प्रो. सोमा कौशिक ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में विभाग की उपलब्धियों, विकास यात्रा और मरीजों की बेहतर देखभाल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में सैफई स्थित उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (UPUMS) के पूर्व कुलपति और एम्स पटना के पूर्व निदेशक प्रो. पी.के. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
समारोह के दौरान प्रो. पी.के. सिंह ने सातवां प्रो. सोमा कौशिक ओरेशन दिया। अपने व्याख्यान में उन्होंने विभाग के प्रभावी संचालन, बेहतर प्रबंधन और विभागीय सदस्यों की जिम्मेदारियों पर विचार रखे। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमान, डीन प्रो. मनोज जैन, एनेस्थिसियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. संजय धीरज, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) प्रो. देवेंद्र गुप्ता, कर्नल वरुण बाजपेयी, प्रो. अनिल अग्रवाल और प्रो. शशि श्रीवास्तव सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

दो ऑपरेशन थिएटरों से 50 से अधिक तक पहुंचा विभाग का सफर
स्थापना दिवस समारोह में विभागाध्यक्ष प्रो. संजय धीरज ने एनेस्थिसियोलॉजी विभाग की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विभाग की शुरुआत महज दो ऑपरेशन थिएटरों से हुई थी, लेकिन समय के साथ इसका दायरा लगातार बढ़ा है। आज विभाग संस्थान में 50 से अधिक ऑपरेशन थिएटरों में एनेस्थीसिया सेवाएं प्रदान कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सर्जरी के क्षेत्र में प्रगति के साथ मरीजों की देखभाल और प्रबंधन की जटिलताएं भी बढ़ी हैं। इसके बावजूद एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की भूमिका के बारे में आम लोगों में जागरूकता अपेक्षाकृत कम है। एनेस्थीसिया को अक्सर केवल ऑपरेशन के दौरान मरीज को बेहोश करने की प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है, जबकि वास्तव में इसमें मरीज की स्थिति का आकलन, सुरक्षा और सर्जरी के आसपास की संपूर्ण चिकित्सा देखभाल जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं।

सर्जरी से पहले, दौरान और बाद तक मरीज की देखभाल पर जोर
प्रो. संजय धीरज ने बताया कि मरीजों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभाग ‘पेरिऑपरेटिव मेडिसिन’ (Perioperative Medicine) की अवधारणा को बढ़ावा दे रहा है। इस अवधारणा के अंतर्गत एनेस्थिसियोलॉजिस्ट की भूमिका केवल सर्जरी के दौरान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सर्जरी से पहले मरीज की तैयारी, ऑपरेशन के समय उसकी निगरानी और सर्जरी के बाद की देखभाल तक विस्तृत होती है।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे सर्जरी की संख्या और जटिलता बढ़ती है, वैसे-वैसे मरीज के समग्र प्रबंधन की आवश्यकता भी बढ़ती है। ऐसे में एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की भूमिका मरीज की सुरक्षा और बेहतर उपचार परिणामों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।
विभाग की ओर से पेरिऑपरेटिव मेडिसिन के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को एनेस्थिसियोलॉजी की भूमिका और महत्व के बारे में बेहतर जानकारी मिल सके।
निदेशक प्रो. आर.के. धीमान ने विभाग को दी बधाई
संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमान ने एनेस्थिसियोलॉजी विभाग को 39वें स्थापना दिवस की बधाई दी और उसकी कार्यप्रणाली की सराहना की। उन्होंने विभाग के फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग और तकनीकी स्टाफ को अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि विभाग के सभी सदस्य मिलकर SGPGIMS के एनेस्थिसियोलॉजी विभाग को देश के अग्रणी विभागों में शामिल करने की दिशा में निरंतर प्रयास करेंगे।
वहीं, डीन प्रो. मनोज जैन ने मेडिकल विद्यार्थियों और मरीजों के हित में एनेस्थिसियोलॉजी के क्षेत्र में विभिन्न पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए विभाग की सराहना की। उन्होंने विभाग के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगे भी नई उपलब्धियां हासिल करने की उम्मीद जताई।

वरिष्ठों की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान
स्थापना दिवस कार्यक्रम के नोडल फैकल्टी डॉ. संदीप खुबा ने विभाग की विरासत और संस्थान की परंपराओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभाग के वरिष्ठों और पूर्ववर्ती सदस्यों ने जो परंपराएं और कार्यसंस्कृति स्थापित की हैं, उन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी वर्तमान सदस्यों के कंधों पर है।
कार्यक्रम के दौरान विभाग की शैक्षणिक, चिकित्सकीय और संस्थागत उपलब्धियों को याद किया गया। साथ ही, विभाग से जुड़े विभिन्न स्तरों के कर्मचारियों के योगदान को भी महत्व दिया गया।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले फैकल्टी और कर्मचारियों को सम्मान
स्थापना दिवस समारोह में वर्ष 2026 के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, कार्यालय कर्मचारियों, नर्सिंग अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।
पुरस्कार पाने वालों की सूची इस प्रकार रही:
- बेस्ट फैकल्टी: डॉ. तापस कुमार सिंह
- बेस्ट जूनियर रेजिडेंट III: डॉ. मीनाक्षी के, डॉ. प्रशंसा अत्री और डॉ. राहुल कुमार मिश्रा
- बेस्ट ऑफिस स्टाफ: श्री पवन कुमार दुबे
- बेस्ट नर्सिंग ऑफिसर: श्री सचिन पी. जोसेफ
- बेस्ट नर्सिंग ऑफिसर (आउटसोर्स): श्री अमित तिवारी
- बेस्ट टेक्निकल ऑफिसर: श्री चंद्रेश कुमार कश्यप
- बेस्ट टेक्निकल ऑफिसर (आउटसोर्स): सुश्री रुचि सिंह
- बेस्ट सीनियर रेजिडेंट्स: डॉ. जैस्मीन कौर, डॉ. अर्पिता यादव, डॉ. श्रद्धा गांगले, डॉ. आयुषी श्रीवास्तव और डॉ. दीक्षा रानी
सम्मान समारोह के माध्यम से विभाग के उन सदस्यों के योगदान को सराहा गया, जिन्होंने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

मां सरस्वती की वंदना से हुआ सांस्कृतिक आयोजन
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। विभाग की तकनीकी कर्मचारी प्रमिला, रुचि, शिवानी, किरण, रिंकी और कौशिकी ने अपनी सुरीली आवाज में मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने समारोह में उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. संदीप खुबा, डॉ. सुरुचि, डॉ. सपना यादव, श्री शंकर लाल तथा विभाग के रेजिडेंट्स और तकनीकी स्टाफ के सहयोग से किया गया। विभाग के सीनियर टेक्निकल ऑफिसर श्री राजीव सक्सेना ने आयोजन के साथ-साथ मीडिया और प्रतिनिधियों के साथ समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
समारोह के जरिए विभाग की 39 वर्षों की यात्रा, चिकित्सा सेवाओं में उसके योगदान और मरीजों की समग्र देखभाल में एनेस्थिसियोलॉजी की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया गया।





