कहीं गोदाम जर्जर, कहीं नलकूप बंद, आखिर कब सुधरेंगे गांव के हालात?
मऊ- किसान दिवस की बैठक में उठी शिकायतों ने ग्रामीण विकास के दावों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए। कहीं सहकारी समिति का गोदाम जर्जर है, तो कहीं पानी की टंकी के पिलर क्षतिग्रस्त हैं। बिजली का पोल गिरने और राजकीय नलकूप लंबे समय से बंद रहने जैसी समस्याएं भी किसानों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर गांवों की तस्वीर बदलने के लिए जिम्मेदार विभाग कितने गंभीर हैं? मासिक समीक्षा बैठक में किसानों ने खेती-किसानी के साथ गांव की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए। किसान देवेंद्र सिंह ने सहकारी समिति के गोदाम की बदहाली और उसकी जमीन पर अतिक्रमण का मामला सामने रखा। वहीं, क्षतिग्रस्त ढांचे और बिजली व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों ने सुरक्षा इंतजामों पर ध्यान देने की जरूरत बताई। बैठक में खुशामदपुर में सरकारी विद्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और आंगनबाड़ी कार्यकत्री की नियुक्ति का मुद्दा भी उठा। इससे स्पष्ट हुआ कि ग्रामीणों की जरूरतें केवल खेत और फसल तक सीमित नहीं हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित पेयजल जैसी सुविधाएं भी ग्रामीण जीवन का अहम हिस्सा हैं। जिला कृषि अधिकारी ने यूरिया और डीएपी की उपलब्धता का भरोसा दिलाया, जबकि जिला विकास अधिकारी ने समस्याओं का प्राथमिकता से निस्तारण करने का आश्वासन दिया। अब असली चुनौती इन आश्वासनों को जमीन पर उतारने की है। शिकायतों के निस्तारण की समयसीमा तय करने और अगली बैठक में कार्रवाई का हिसाब देने से ही जवाबदेही सुनिश्चित होगी। किसान दिवस की सार्थकता तभी साबित होगी, जब किसानों को समस्याएं दोहरानी न पड़ें और गांवों में बदलाव साफ दिखाई दे। इस दौरान उप कृषि निदेशक, अधिशासी अभियंता विद्युत आशीष कुमार, किसान बृजेश यादव, मदन मोहन राय, परमात्मा सिंह, देवेंद्र सिंह, देव प्रकाश राय और राकेश सिंह सहित अन्य किसान मौजूद रहे।




