लखनऊ, 6 अक्टूबर 2026। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ में स्कूल ऑफ योग, नेचुरोपैथी एंड कॉग्निटिव स्टडीज (SYNCs) के योग विभाग की ओर से ‘BRAIN POTENTIAL: THE EEG WORKSHOP – Exploring Brain Signals for Scientific Discovery and Real-World Applications’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मस्तिष्क संकेतों, इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (EEG), न्यूरोसाइंस और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों के साथ महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों और उनसे जुड़े संकेतों को समझने के साथ-साथ EEG तकनीक के वैज्ञानिक शोध तथा वास्तविक जीवन में संभावित उपयोगों की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना रहा।

EEG तकनीक से मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों को समझने पर जोर
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में Magstim EGI, USA के डॉ. सुहास विंचुरकर उपस्थित रहे। मंच पर योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एआई, बीबीएयू की समन्वयक प्रो. बबिता पाण्डेय तथा डॉ. नवीन जी.एच. मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय कुलगीत का गायन किया गया। आयोजन समिति की ओर से मुख्य अतिथि एवं उपस्थित शिक्षकों को पौधे भेंट कर उनका स्वागत एवं आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्य एवं इसकी रूपरेखा से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
न्यूरोसाइंस में EEG, ERP और BCI का बढ़ रहा महत्व
मुख्य अतिथि डॉ. सुहास विंचुरकर ने अपने संबोधन में कहा कि EEG तकनीक के माध्यम से मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों और उससे जुड़े विभिन्न संकेतों को वैज्ञानिक तरीके से समझने में मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में EEG, ERP और Brain-Computer Interface (BCI) जैसी तकनीकों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि इन तकनीकों के माध्यम से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझने के साथ-साथ शोध, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और विभिन्न वास्तविक जीवन के अनुप्रयोगों में नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।
डॉ. विंचुरकर ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अत्याधुनिक न्यूरोसाइंस तकनीकों की व्यावहारिक समझ प्रदान करने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने EEG के वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार उपयोग के साथ न्यूरल प्राइवेसी, सूचित सहमति और नैतिक पहलुओं को समझने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि अकादमिक संस्थानों में इस प्रकार के प्रशिक्षण से युवा शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीकों के साथ काम करने और भविष्य में न्यूरोसाइंस एवं ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा।

EEG को सुरक्षित और गैर-आक्रामक तकनीक बताया
योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को समझना और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने EEG को एक सुरक्षित, गैर-आक्रामक और दर्द-रहित तकनीक बताते हुए कहा कि इसमें खोपड़ी पर इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं, जिनके माध्यम से मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों और वोल्टेज में होने वाले बदलावों को मिलीसेकंड स्तर की उच्च सटीकता के साथ रिकॉर्ड किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि EEG के माध्यम से मस्तिष्क की विभिन्न तरंगों का अध्ययन किया जाता है। इनमें डेल्टा तरंगें, जो गहरी नींद और रिकवरी से जुड़ी होती हैं; थीटा तरंगें, जिनका संबंध ध्यान एवं स्मृति से जोड़ा जाता है; अल्फा तरंगें, जो शांत जागरूकता की स्थिति से संबंधित हैं; तथा बीटा तरंगें, जो सक्रिय सोच और ध्यान केंद्रित करने से जुड़ी होती हैं, प्रमुख हैं।
कार्यशाला में इस बात पर भी चर्चा की गई कि न्यूरोसाइंस की आधुनिक तकनीकों का उपयोग केवल मेडिकल और क्लीनिकल रिसर्च तक सीमित नहीं है, बल्कि माइंडफुलनेस, तनाव प्रबंधन और संज्ञानात्मक प्रदर्शन को बेहतर समझने जैसे क्षेत्रों में भी शोध की संभावनाएं मौजूद हैं।
चार सत्रों में EEG और BCI की व्यावहारिक जानकारी
एक दिवसीय कार्यशाला में कुल चार सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में EEG, न्यूरोनल कंडक्शन, एक्शन पोटेंशियल्स, इवोक्ड पोटेंशियल्स, इवेंट-रिलेटेड पोटेंशियल्स और BCI जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को विभिन्न तकनीकों का लाइव प्रदर्शन भी कराया गया।
पहले सत्र में EEG के मूलभूत सिद्धांतों और मस्तिष्क संकेतों के बारे में जानकारी दी गई। दूसरे सत्र में न्यूरोनल कंडक्शन और एक्शन पोटेंशियल्स की कार्यप्रणाली पर चर्चा हुई।
तीसरे सत्र में Evoked Potentials (EP), Event-Related Potentials (ERP) और सामाजिक विज्ञान में इनके शोध अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला गया। चौथे सत्र की शुरुआत EEG के व्यावहारिक प्रदर्शन के साथ हुई, जिसमें प्रतिभागियों को तकनीक से संबंधित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी गई।
व्यावहारिक प्रदर्शन के बाद प्रमुख सीख और महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। इसके बाद प्रतिभागियों के लिए प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने कार्यशाला को लेकर अपने अनुभव और फीडबैक साझा किए।
EEG डेटा से लेकर BCI और न्यूरोमॉड्यूलेशन तक चर्चा
कार्यशाला में EEG के मूलभूत सिद्धांतों के साथ-साथ EEG एवं ERP डेटा के अधिग्रहण, मस्तिष्क की कार्यप्रणाली के संकेतकों की पहचान के लिए विश्लेषण प्रोटोकॉल और शोध में इनके उपयोग की जानकारी दी गई।
इसके अलावा ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) और न्यूरोमॉड्यूलेशन के संभावित अनुप्रयोगों पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों को प्रयोगशाला एवं फील्ड रिसर्च के लिए उपयुक्त उपकरणों के चयन और अकादमिक तथा उद्योग विशेषज्ञों से व्यावहारिक प्रशिक्षण के महत्व के बारे में बताया गया।
कार्यशाला में तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ BCI के नैतिक पक्ष को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। न्यूरल प्राइवेसी, सूचित सहमति, सुरक्षा और ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस के जिम्मेदार उपयोग जैसे विषयों पर विशेष चर्चा की गई।
प्रतिभागियों को दिए गए EEG प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र
कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों को EEG प्रशिक्षण के प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। आयोजकों के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक न्यूरोसाइंस तकनीकों की बुनियादी एवं व्यावहारिक समझ विकसित करने में मदद करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. कंचन यादव सहित अन्य शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
बीबीएयू में आयोजित यह कार्यशाला न्यूरोसाइंस, EEG और BCI जैसे उभरते क्षेत्रों में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल के रूप में सामने आई।




