बीबीएयू के 12 शिक्षक विश्व के टॉप 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल, लखनऊ विश्वविद्यालय को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

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लखनऊ, 8 अक्टूबर 2026। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ के 12 शिक्षकों ने विश्व के टॉप 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की प्रतिष्ठित सूची में स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय का नाम अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं शोध जगत में और मजबूत हुआ है। चयनित शिक्षकों ने विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में अपने शोध कार्यों, अकादमिक योगदान और शोध प्रकाशनों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी दर्शाती है।

विश्वविद्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. जॉन पी. ए. आयोनिडिस के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम द्वारा तैयार की जाती है। इसे एल्सेवियर बी.वी. के माध्यम से प्रकाशित किया जाता है। इस सूची में वैज्ञानिकों के शोध प्रकाशनों, अन्य शोधकर्ताओं द्वारा उनके कार्यों को दिए गए उद्धरणों (साइटेशन) और विभिन्न वैज्ञानिक संकेतकों के आधार पर उनके शोध प्रभाव का आकलन किया जाता है।

कुलपति ने चयनित शिक्षकों को दी बधाई

बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने इस उपलब्धि पर सभी चयनित शिक्षकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के 12 शिक्षकों का विश्व के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होना पूरे संस्थान के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में हो रहे गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता का प्रमाण है।

कुलपति ने उम्मीद जताई कि शिक्षकों की यह सफलता विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों, युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को भी उच्च स्तरीय अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगी। वैश्विक स्तर पर शोध कार्यों की स्वीकार्यता किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की अकादमिक प्रगति का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। ऐसे में बीबीएयू के 12 शिक्षकों का इस सूची में स्थान पाना विश्वविद्यालय के शोध वातावरण के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्रो. नवीन कुमार अरोरा ने हासिल की 17,679वीं रैंक

विश्वविद्यालय की ओर से जारी विवरण के अनुसार, पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो. नवीन कुमार अरोरा ने 17,679वीं रैंक प्राप्त की है। एन्वायरमेंटल माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रो. राम चंद्रा ने 24,876वीं रैंक, प्रो. राम नरेश भार्गव ने 39,424वीं रैंक और डॉ. जयशंकर सिंह ने 52,213वीं रैंक हासिल की।

भौतिक विज्ञान विभाग के डॉ. राजेश कुमार सिंह ने 53,275वीं रैंक प्राप्त कर सूची में स्थान बनाया, जबकि कम्प्यूटर साइंस विभाग के डॉ. आदित्य खम्पारिया को 79,246वीं रैंक मिली। इन शिक्षकों की उपलब्धियां विभिन्न वैज्ञानिक विषयों में किए जा रहे शोध कार्यों और उनके अकादमिक योगदान को रेखांकित करती हैं।

गणित, भौतिक विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी के शिक्षक भी शामिल

गणित विभाग के प्रो. बीर सिंह भदौरिया ने 1,02,213वीं रैंक हासिल की। भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. बाल चंद्र यादव को 1,04,035वीं रैंक प्राप्त हुई। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. अभिषेक वर्मा ने 2,41,090वीं रैंक हासिल कर सूची में स्थान बनाया।

फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग के प्रो. पी.एस. रजनीकांत ने 2,69,674वीं रैंक प्राप्त की। गणित विभाग के डॉ. मुकेश कुमार अवस्थी को 3,43,459वीं रैंक मिली, जबकि भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. देवेश कुमार ने 4,46,561वीं रैंक हासिल की।

इस प्रकार पर्यावरण विज्ञान, पर्यावरणीय सूक्ष्मजीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, कम्प्यूटर साइंस, गणित, सूचना प्रौद्योगिकी और फार्मास्युटिकल साइंसेज सहित कई क्षेत्रों के शिक्षकों ने इस सूची में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

 

वैज्ञानिकों का मूल्यांकन किन आधारों पर होता है?

विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची तैयार करने में वैज्ञानिकों के शोध और अकादमिक योगदान का मूल्यांकन साइंस-मेट्रिक्स यानी वैज्ञानिक शोध के मात्रात्मक विश्लेषण से जुड़ी प्रणाली के आधार पर किया जाता है। इस प्रक्रिया में शोध प्रकाशनों की संख्या, साइटेशन और अन्य वैज्ञानिक संकेतकों को ध्यान में रखा जाता है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वैज्ञानिक क्षेत्रों को 22 प्रमुख क्षेत्रों और 174 उप-क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है। इससे अलग-अलग विषयों में काम करने वाले शोधकर्ताओं के योगदान का संबंधित वैज्ञानिक क्षेत्र के संदर्भ में आकलन किया जा सकता है।

सूची तैयार करने की प्रक्रिया में वैज्ञानिकों के शोध आंकड़ों को अद्यतन करने के बाद उनके प्रदर्शन का विश्लेषण किया जाता है। इसमें समग्र संकेतक (सी-स्कोर), स्व-साइटेशन सहित और स्व-साइटेशन रहित आंकड़ों तथा संबंधित उप-क्षेत्र में प्रतिशत रैंक जैसे मानकों का उपयोग किया जाता है। सूची में स्थान मिलना शोध कार्यों के वैज्ञानिक प्रभाव और अकादमिक योगदान का एक संकेतक है; हालांकि, किसी वैज्ञानिक के पूरे योगदान का आकलन केवल रैंक से नहीं किया जा सकता।

शोध और नवाचार के लिए अनुकूल अकादमिक वातावरण

बीबीएयू के 12 शिक्षकों की इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय में शोध एवं नवाचार के लिए विकसित हो रहे अकादमिक वातावरण से जोड़कर देखा जा रहा है। विभिन्न विषयों में शिक्षकों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि विश्वविद्यालय में विज्ञान और तकनीक से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में अनुसंधान गतिविधियां जारी हैं।

विश्वविद्यालयों के लिए गुणवत्तापूर्ण शोध न केवल अकादमिक प्रतिष्ठा बढ़ाता है, बल्कि विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नए विषयों पर काम करने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोध समुदाय से जुड़ने के अवसर भी प्रदान करता है। इस तरह की उपलब्धियां शोध आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

कुलसचिव सहित विश्वविद्यालय परिवार ने दी शुभकामनाएं

इस उपलब्धि पर बीबीएयू के कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने चयनित शिक्षकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने चयनित शिक्षकों की उपलब्धि को संस्थान के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए इसे गुणवत्तापूर्ण शोध और अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता के रूप में रेखांकित किया है। बीबीएयू के लिए यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय शोध जगत में अपनी पहचान मजबूत करने और भविष्य में अनुसंधान गतिविधियों को और प्रोत्साहित करने का अवसर है।

 

 

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