परीक्षा अनियमितताओं पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र में परीक्षा पेपर लीक मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए नागपुर और औरंगाबाद में दो विशेष अदालतें नामित कीं। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक से निपटने के लिए एक नए कानून और फास्ट-ट्रैक अदालतों के वादे के एक दिन बाद आया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र वी घुगे ने कहा कि नागपुर और औरंगाबाद में अदालतें केंद्र सरकार के अनुरोध के बाद स्थापित की गईं, जिसने कम से कम दो प्रमुख शहरों में दो विशेष अदालतों की मांग की थी।
विशेष अदालतें सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 के तहत सुनवाई करेंगी। 2024 का कानून तीन महीने के भीतर सुनवाई समाप्त करने का आदेश देता है।
न्यायाधीश एसवी पवार औरंगाबाद और न्यायाधीश गुलशन कोलते नागपुर में अदालत की अध्यक्षता करेंगे। केंद्र सरकार ने अदालतों की अध्यक्षता के लिए अनुभवी न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति का अनुरोध किया।
कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जिन्हें पिछले शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर विरोध स्थल से जबरन हटाए जाने से आंदोलन को बल मिला, ने सरकार के आश्वासन के बाद अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल, जो शिक्षा सुधारों के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहा था, केंद्रीय मंत्रियों के साथ बातचीत करने वाला था। विरोध आयोजकों ने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा।
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