बंद मिलें, बेहाल बुनकर और पलायन करते युवा… मऊ की तस्वीर पर शक्ति सिंह का तीखा सवाल

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टेक्सटाइल हब और यार्न बैंक की स्थापना अब तक क्यों नहीं?

मऊ- शनिवार। कभी करघों की खटखटाहट से अपनी पहचान बनाने वाला मऊ आज रोजगार, उद्योग और बुनियादी सुविधाओं की राह देख रहा है। इसी बदली हुई तस्वीर को मुद्दा बनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं डूसू के पूर्व अध्यक्ष शक्ति सिंह ने मऊ सदर विधायक अब्बास अंसारी के सामने विकास से जुड़े सात तीखे सवाल रखकर जिले की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। शक्ति सिंह ने सवाल उठाया कि जिस जनपद की पहचान कभी हैंडलूम उद्योग से थी, वहां आज बुनकरों के सामने रोजी-रोटी का संकट क्यों है? परदहां और स्वदेशी कॉटन मिलों के बंद होने के बाद रोजगार के नए विकल्प क्यों नहीं तैयार हुए? कपड़ा उद्योग को नई उड़ान देने के लिए टेक्सटाइल हब और यार्न बैंक जैसी सुविधाएं अब तक क्यों नहीं विकसित हो सकीं? उनके सवाल केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहे। व्यापारियों की सुरक्षा, गरीबों के बेहतर इलाज, जलभराव से मुक्ति, सरकारी योजनाओं का लाभ और विधायक की जनता के बीच उपलब्धता जैसे मुद्दों को भी उन्होंने प्रमुखता से उठाया। शक्ति सिंह ने करीब तीन दशक की राजनीतिक विरासत पर सवाल करते हुए कहा कि मऊ की पहचान मुकदमों और विवादों से नहीं, बल्कि उद्योग, रोजगार और विकास से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिले के युवाओं को पलायन की मजबूरी से मुक्ति, बुनकरों को काम, व्यापारियों को सुरक्षित माहौल और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं चाहिए। इसके लिए जनप्रतिनिधि को विधानसभा से लेकर गांव की चौपाल तक जनता की आवाज बनना होगा। शक्ति सिंह के इन सात सवालों ने मऊ की राजनीति के सामने एक बड़ा मुद्दा खड़ा कर दिया है— आखिर जनता को राजनीतिक विरासत का हिसाब चाहिए या विकास की नई इबारत? अब इन सवालों पर विधायक पक्ष की प्रतिक्रिया और जवाब का इंतजार रहेगा।

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