गांव की 131 महिला किसानों ने लिया हिस्सा, आत्मनिर्भरता और संगठित खेती का मिला मंत्र
मऊ – खेती-किसानी की बात हो और महिलाओं के पसीने व मेहनत का जिक्र न आए, ऐसा भला कैसे हो सकता है! खेत में बुवाई से लेकर फसल की देखभाल, बीजों को सहेजने और पशुपालन तक गांव की महिलाएं हर कदम पर अपनी अहम भूमिका निभाती हैं। इसी मेहनत को सम्मान देने और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देने के लिए 15 अक्टूबर को भा.कृ.अनु.प.-राष्ट्रीय बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में महिला किसान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में आसपास के गांवों की 131 महिला किसानों ने भाग लिया। संस्थान के निदेशक डॉ. ए. आनंदन ने महिला किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि सशक्त महिलाएं ही कृषि और खाद्य व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की मजबूत आधारशिला हैं। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि खेती के हर पड़ाव पर महिलाओं का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके श्रम को अपेक्षित पहचान नहीं मिल पाती। उन्होंने महिलाओं को बीज और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम समन्वयक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार ने महिला किसानों से अपील की कि वे घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपनी प्रतिभा को भी आगे बढ़ाएं। स्वयं सहायता समूहों और सहकारी संस्थाओं से जुड़कर महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ा सकती हैं और जरूरत के समय आर्थिक संबल भी पा सकती हैं। वैज्ञानिक डॉ. विनीता रामटेके ने महिलाओं के हित में संचालित सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और उनके योगदान की सराहना की। वरिष्ठ तकनीशियन कुमारी निशा ने सफल महिला किसानों और कृषक समूहों की प्रेरक कहानियां सुनाईं। इस दौरान संस्थान की महिला वैज्ञानिकों एवं कर्मचारी मौजूद रहे।




