अधिकारियों ने कहा कि बलिया जिले में दो पुलिस निरीक्षकों को एक बलात्कार पीड़िता द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया है कि उनमें से एक ने उसके कथित बलात्कारी के खिलाफ आरोप पत्र दायर करने के बदले में यौन संबंध बनाने की मांग की थी।

दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस ने कहा कि आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 79 (शब्द, इशारा या शील भंग करने के इरादे से किया गया कार्य) और 351(3) (आपराधिक धमकी) के साथ-साथ धारा 75 (यौन उत्पीड़न) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एक ऑडियो क्लिप जिसमें कथित तौर पर इंस्पेक्टर क्राइम नरेश मलिक और उभांव पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) संजय शुक्ला एक महिला के साथ आपत्तिजनक बातचीत कर रहे हैं, सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि मलिक ने धमकी दी कि अगर उसने उसकी मांगें मानने से इनकार कर दिया तो वह जान-बूझकर गलत व्यवहार करेगा या अदालत में गलत तरीके से आरोप पत्र दाखिल करेगा।
गौरतलब है कि मामला 20 फरवरी को महिला की शिकायत के आधार पर उभांव थाने में दर्ज करायी गयी शिकायत से जुड़ा है. 30 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया कि वन अधिकारी उग्रसेन कुमार जयसवाल ने शादी का झांसा देकर करीब छह महीने तक उसके साथ बलात्कार किया. उसने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने पर उसने उसे जान से मारने की धमकी दी।
जब महिला ने उभांव पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई तो 20 फरवरी को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत जायसवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जायसवाल को 24 फरवरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था.
पुलिस अधीक्षक (एसपी) ओमवीर सिंह ने कहा, इंस्पेक्टर क्राइम नरेश मलिक, जो शिकायतकर्ता के कथित बलात्कार मामले में जांच अधिकारी थे, ने कार्यवाही को सुविधाजनक बनाने के लिए बलात्कार पीड़िता को अकेले में मिलने के लिए बुलाना शुरू कर दिया। “एसएचओ संजय शुक्ला ने भी कथित तौर पर उसे बुलाया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।”
एसपी ने कहा कि सोमवार को मामला उनके संज्ञान में आने के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया. जांच के आदेश दे दिए गए हैं और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (उत्तर) दिनेश कुमार शुक्ला को आरोपों की जांच सौंपी गई है। उन्होंने कहा, “जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”




