डॉ. आरपी सिंह के कार्यकाल में भारतीय हॉकी की एशियाई सफलता, अब विश्व स्तर पर पदक जीतने की चुनौती

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लखनऊ, 9 अक्टूबर 2026। भारतीय हॉकी टीमों ने जापान में आयोजित 20वें एशियाई खेलों में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पुरुष और महिला दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीते। हॉकी इंडिया की पुरुष चयन समिति के चेयरमैन और उत्तर प्रदेश हॉकी के अध्यक्ष डॉ. आरपी सिंह ने इस सफलता को खिलाड़ियों की मेहनत, चयन प्रक्रिया और लगातार तैयारी का परिणाम बताया है। अब भारतीय हॉकी के सामने एशियाई स्तर पर मिली कामयाबी को विश्व स्तर पर पदकों में बदलने की चुनौती है।

डॉ. आरपी सिंह ने लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीमों के प्रदर्शन, चयन प्रक्रिया और भविष्य की तैयारियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को बेहतर अवसर, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और उच्च स्तरीय मुकाबलों में खेलने का मौका देना जरूरी है। चयन प्रक्रिया में खिलाड़ियों की मौजूदा फॉर्म, फिटनेस, प्रदर्शन और टीम की जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है। सीनियर टीमों के साथ जूनियर और अंडर-18 स्तर पर प्रतिभाओं को तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

एशियन गेम्स में पुरुष और महिला टीमों ने जीते स्वर्ण पदक

जापान में आयोजित 2026 एशियन गेम्स भारतीय हॉकी के लिए ऐतिहासिक रहे। पुरुष टीम ने फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता और लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों का खिताब अपने नाम किया। महिला टीम ने भी स्वर्ण पदक जीतकर देश को दोहरी खुशी दी। यह पहली बार था जब भारत ने एक ही एशियन गेम्स संस्करण में पुरुष और महिला हॉकी दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक हासिल किए। पुरुष टीम की जीत ने लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिए भी भारत की जगह सुनिश्चित की।

डॉ. आरपी सिंह के अनुसार, इस तरह की उपलब्धियों को कायम रखने के लिए चयनकर्ताओं, प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों के बीच निरंतर समन्वय जरूरी है। बड़े टूर्नामेंटों के लिए टीम तैयार करना लंबी प्रक्रिया है, जिसमें घरेलू प्रदर्शन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में खिलाड़ियों की क्षमता का आकलन भी किया जाता है।

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पिछले वर्षों में भी भारतीय हॉकी ने दर्ज की उपलब्धियां

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने 2023 एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद 2024 पेरिस ओलंपिक में टीम ने कांस्य पदक हासिल किया और एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भी खिताब जीता। वर्ष 2025 में राजगीर में आयोजित पुरुष एशिया कप में भारत चैंपियन बना। इन उपलब्धियों ने एशियाई हॉकी में भारतीय टीम की स्थिति को मजबूत किया।

महिला टीम ने भी लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। वर्ष 2023 में एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद टीम ने महिला एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के खिताब अपने नाम किए। वर्ष 2025 के महिला एशिया कप में टीम उपविजेता रही, जबकि 2026 में महिला एफआईएच नेशंस कप में पहला स्थान हासिल करने की उपलब्धि भी विज्ञप्ति में दर्ज है।

जूनियर और अंडर-18 स्तर पर प्रतिभाओं को तैयार करने पर जोर

भारतीय हॉकी के भविष्य के लिए जूनियर स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करना महत्वपूर्ण है। विज्ञप्ति के अनुसार, 2026 में चीन में आयोजित जूनियर एशिया कप में भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने स्वर्ण पदक जीते। काकामीगाहारा में आयोजित अंडर-18 एशिया कप में पुरुष टीम ने स्वर्ण और महिला टीम ने कांस्य पदक हासिल किया।

वर्ष 2025 में तमिलनाडु में आयोजित एफआईएच पुरुष जूनियर विश्व कप में भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता। सुल्तान जोहोर कप 2025 में जूनियर टीम उपविजेता रही थी। इससे पहले 2024 और 2023 में भी टीम ने कांस्य पदक जीते थे। वर्ष 2024 में मस्कट में आयोजित जूनियर एशिया कप में भारतीय पुरुष और महिला दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक हासिल किए थे।

जूनियर स्तर पर इन परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि खिलाड़ियों को शुरुआती दौर से अंतरराष्ट्रीय अनुभव देने और उन्हें वरिष्ठ टीम के लिए तैयार करने की प्रक्रिया अहम है। चयन समिति के सामने चुनौती यह भी है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को उचित समय पर आगे बढ़ने के अवसर मिलें।

फाइव-ए-साइड हॉकी में भी भारत का प्रदर्शन

हॉकी के फाइव-ए-साइड प्रारूप में भी भारतीय टीमों ने उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 2026 एशियन हॉकी फाइव-ए-साइड प्रतियोगिता में पुरुष टीम विजेता रही, जबकि महिला टीम ने उपविजेता का स्थान हासिल किया। वर्ष 2024 में एफआईएच फाइव-ए-साइड महिला विश्व कप में भारतीय महिला टीम ने रजत पदक जीता था।

फाइव-ए-साइड हॉकी तेज गति और कम समय में निर्णय लेने की क्षमता पर आधारित प्रारूप है। इसमें खिलाड़ियों की तकनीक, फिटनेस और त्वरित तालमेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस प्रारूप में अच्छा प्रदर्शन भारतीय हॉकी के लिए एक अतिरिक्त उपलब्धि है।

विश्व कप में प्रदर्शन सुधारना अगला लक्ष्य

एशियाई स्तर पर मिली सफलता के बावजूद विश्व स्तर पर भारतीय टीमों के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। 2026 एफआईएच हॉकी विश्व कप में भारतीय पुरुष टीम आठवें स्थान पर रही, जबकि महिला टीम ने पांचवां स्थान हासिल किया। हॉकी इंडिया के आधिकारिक परिणामों के अनुसार, पुरुष टीम का अभियान आठवें स्थान पर समाप्त हुआ, जबकि महिला टीम ने जर्मनी को 3-1 से हराकर पांचवां स्थान सुनिश्चित किया।

इन नतीजों के बाद भारतीय हॉकी के लिए अगला महत्वपूर्ण लक्ष्य एशियाई प्रतियोगिताओं की सफलता को विश्व कप और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी पदक में बदलना होगा। इसके लिए खिलाड़ियों को मजबूत अंतरराष्ट्रीय टीमों के खिलाफ नियमित मुकाबले, बेहतर प्रशिक्षण और दबाव में प्रदर्शन करने का अनुभव देना महत्वपूर्ण रहेगा।

डॉ. आनन्देश्वर पाण्डेय ने भारतीय टीमों को दी बधाई

उत्तर प्रदेश ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. आनन्देश्वर पाण्डेय ने एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों के स्वर्ण पदक जीतने पर खुशी जताई। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का विषय बताया और कहा कि डॉ. आरपी सिंह का अनुभव मुख्य चयनकर्ता के रूप में भारतीय हॉकी को आगे बढ़ाने में उपयोगी है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय टीमें भविष्य में भी अच्छा प्रदर्शन जारी रखेंगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगी।

उत्तर प्रदेश में हॉकी को बढ़ावा देने के प्रयास

उत्तर प्रदेश हॉकी के सचिव रजनीश मिश्रा ने भी डॉ. आरपी सिंह के अनुभव और हॉकी से उनके लंबे जुड़ाव को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में हॉकी को प्रोत्साहित करने और नई प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन से खिलाड़ियों को बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिली है। राज्य में हॉकी की आधारभूत संरचना, प्रशिक्षण और प्रतिभा पहचान पर ध्यान देना भविष्य में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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पूर्व कप्तान और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे हैं डॉ. आरपी सिंह

डॉ. आरपी सिंह स्वयं भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रहे हैं। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने 1986 सियोल और 1990 बीजिंग एशियन गेम्स, 1989 एशिया कप तथा 1986 और 1990 विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह 1988 प्री-ओलंपिक और सुल्तान अजलान शाह कप की स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य भी रहे हैं।

प्रशासक के रूप में उनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं। इनमें 2016 लखनऊ जूनियर हॉकी विश्व कप और 2019 इंडो-फ्रांस महिला हॉकी टेस्ट सीरीज प्रमुख हैं।

भारतीय हॉकी के लिए आगे की राह

एशियन गेम्स में पुरुष और महिला टीमों के स्वर्ण पदक भारतीय हॉकी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं। अब इन सफलताओं को लगातार बनाए रखने, युवा खिलाड़ियों को तैयार करने और विश्व स्तर पर बेहतर परिणाम हासिल करने पर ध्यान देना होगा। चयन प्रक्रिया, प्रशिक्षण, फिटनेस और अंतरराष्ट्रीय अनुभव का बेहतर तालमेल भारतीय हॉकी को आगामी बड़े टूर्नामेंटों में मजबूत स्थिति दिलाने में अहम हो सकता है।

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