बीसीसीआई पर्यवेक्षक की मौजूदगी में होती है प्रक्रिया, दस्तावेजों की दोबारा जांच शुरू होने की खबर को किया खारिज
लखनऊ, 28 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) ने अंडर-16 क्रिकेट खिलाड़ियों के आयु सत्यापन और बोन टेस्ट को लेकर प्रकाशित खबरों पर अपना पक्ष रखते हुए एसोसिएशन के खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार और भ्रामक बताया है। यूपीसीए का कहना है कि खिलाड़ियों की आयु सत्यापन प्रक्रिया भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार और बोर्ड द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक की मौजूदगी में पूरी की जाती है।
एसोसिएशन के अनुसार, आयु सत्यापन के दौरान खिलाड़ियों के संबंधित दस्तावेजों और एक्स-रे की जिम्मेदारी बीसीसीआई पर्यवेक्षक के पास रहती है। 28 अक्टूबर को प्रकाशित खबरों के संबंध में यूपीसीए ने बीसीसीआई के संबंधित अधिकारी से भी जानकारी ली। एसोसिएशन का दावा है कि अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक, इन खबरों के आधार पर दस्तावेजों की दोबारा जांच नहीं की जा रही है। इसी आधार पर यूपीसीए ने पुनः जांच शुरू होने संबंधी खबरों को तथ्यहीन बताया है।
बोन टेस्ट की रेटिंग में अंतर क्यों हो सकता है?
यूपीसीए ने बोन टेस्ट की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए कहा कि टीडब्लू 3 (TW3) पद्धति में हाथ और कलाई के एक्स-रे के आधार पर हड्डियों के विकास का आकलन किया जाता है। एसोसिएशन के मुताबिक, जन्मतिथि के अनुसार उम्र में हर साल एक वर्ष की वृद्धि होती है, लेकिन बच्चों की हड्डियों का विकास समान गति से नहीं होता।
यूपीसीए ने बताया कि खानपान, हार्मोन, स्वास्थ्य और आनुवंशिक कारण हड्डियों के विकास को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से समान उम्र के दो बच्चों की बोन एज अलग-अलग हो सकती है। एक वर्ष बाद बोन टेस्ट की रेटिंग में ठीक एक वर्ष की बढ़ोतरी होना भी अनिवार्य नहीं है।
एसोसिएशन के अनुसार, हड्डियों में बदलाव कम होने या एक्स-रे के आकलन में अंतर के कारण रेटिंग पहले जैसी भी रह सकती है। इसलिए केवल दो अलग-अलग समय की रेटिंग की तुलना करके किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में दोनों एक्स-रे और उनकी जांच प्रक्रिया का विशेषज्ञों से आकलन कराया जाना जरूरी है।
गलत दस्तावेज मिलने पर हो सकती है अनुशासनात्मक कार्रवाई
यूपीसीए ने बताया कि आयु सत्यापन प्रक्रिया में शामिल खिलाड़ियों के माता-पिता या कानूनी अभिभावकों से दस्तावेजों के सत्यापन के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए जाते हैं। इसके तहत बीसीसीआई, संबंधित राज्य क्रिकेट एसोसिएशन और बोर्ड की अधिकृत एजेंसी को खिलाड़ी एवं अभिभावक के दस्तावेजों, पहचान और पुराने रिकॉर्ड की जांच करने की अनुमति दी जाती है।
एसोसिएशन के अनुसार, सहमति पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई दस्तावेज या जानकारी गलत, फर्जी अथवा छेड़छाड़ की हुई पाई जाती है, तो बीसीसीआई के नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसमें संबंधित खिलाड़ी पर खेलने का प्रतिबंध लगाए जाने का प्रावधान भी शामिल है।
यूपीसीए का कहना है कि निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया का उद्देश्य खिलाड़ियों की पात्रता सुनिश्चित करना और प्रतियोगिताओं में नियमों का पालन कराना है।
अंडर-16 में TW3 पद्धति पर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का हवाला
यूपीसीए ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि अंडर-16 प्रतियोगिताओं में TW3 पद्धति अपनाने के बीसीसीआई के नीतिगत निर्णय को दिल्ली हाईकोर्ट का न्यायिक समर्थन प्राप्त है।
एसोसिएशन के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 सितंबर 2015 को बीसीसीआई बनाम आर्यन सहरावत एवं अन्य तथा संबंधित अपीलों, एलपीए संख्या 52/2014 और 53/2014 में अंडर-16 प्रतियोगिताओं के लिए इस पद्धति को अपनाने के बीसीसीआई के नीतिगत निर्णय को उचित माना था और उसमें हस्तक्षेप करने से इनकार किया था।
निष्पक्ष चयन और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता: यूपीसीए
यूपीसीए ने कहा कि वह खिलाड़ियों के निष्पक्ष चयन, पारदर्शिता और पात्र खिलाड़ियों को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। एसोसिएशन ने आयु सत्यापन और बोन टेस्ट को लेकर सामने आई खबरों पर अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि प्रक्रिया बीसीसीआई के निर्धारित नियमों के तहत संचालित की जाती है।
हालांकि, दस्तावेजों की दोबारा जांच से संबंधित जानकारी और अन्य दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए बीसीसीआई के संबंधित अधिकारी या आधिकारिक रिकॉर्ड का विवरण महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल एसोसिएशन का पक्ष यही है कि आयु सत्यापन प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होती है और प्रकाशित खबरों के आधार पर दस्तावेजों की पुनः जांच शुरू नहीं की गई है।




