उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर हुई चर्चा, 10 टीमों ने लिया हिस्सा; शीर्ष 10 प्रतिभागियों को अगले स्तर की प्रतियोगिता में मिलेगा अवसर
लखनऊ, 28 अक्टूबर। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ में बुधवार को सतत विकास लक्ष्य समिति की ओर से प्रथम युवा संसद-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका” रहा। युवा संसद में विद्यार्थियों ने सतत विकास, सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह उपस्थित रहे। मंच पर प्रो. सुनीता मिश्रा, सतत विकास लक्ष्य समिति के अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा तथा डॉ. पद्म जी. ओमार भी मौजूद रहे।

दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय कुलगीत का गायन किया गया। आयोजन समिति की ओर से विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्य अतिथि और उपस्थित शिक्षकों का स्वागत किया गया।
कार्यक्रम संयोजक प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए युवा संसद के उद्देश्य एवं रूपरेखा की जानकारी दी। इस युवा संसद में कुल 10 टीमों ने प्रतिभाग किया। प्रत्येक टीम में आठ प्रतिभागी शामिल थे। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में सतत विकास लक्ष्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक समस्याओं पर तार्किक विचार-विमर्श और समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
समाज की समस्याओं को ध्यान में रखकर हो विश्वविद्यालयों में शोध: प्रो. राज कुमार मित्तल
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध और सामुदायिक सहभागिता का उद्देश्य समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान करना होना चाहिए। शोध एवं शैक्षणिक गतिविधियां ऐसी हों, जिनसे सामाजिक कल्याण को बढ़ावा मिले और सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सार्थक योगदान दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को ज्ञान की संसद के रूप में विकसित होना चाहिए, जहां विद्यार्थियों के बीच ज्ञान, सामाजिकता और आपसी समझ का प्रसार हो तथा किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह के लिए स्थान न हो। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन और आयुष्मान भारत जैसी सरकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक रहने और समाज के हित में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
प्रो. मित्तल ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए व्यक्ति को सबसे पहले स्वयं में सुधार करने का प्रयास करना चाहिए। जब व्यक्ति बेहतर बनेगा, तभी समाज में सुधार होगा और एक बेहतर समाज ही राष्ट्र की प्रगति का आधार बन सकता है।
उन्होंने युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन से जुड़ी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। विद्यार्थियों को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने, आत्मचिंतन करने और अपनी क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी व्यक्तिगत प्रगति के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करना चाहिए।

युवा संसद से लोकतांत्रिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता का विकास: प्रो. अमरपाल सिंह
मुख्य अतिथि प्रो. अमरपाल सिंह ने युवा संसद को विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में युवाओं के लिए संविधान, कानूनों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्व को समझना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि युवा संसद विद्यार्थियों को अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने, तर्कपूर्ण संवाद करने और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखने का अवसर प्रदान करती है। इस मंच के माध्यम से विद्यार्थी संसदीय प्रक्रियाओं, जनहित से जुड़े मुद्दों और निर्णय लेने की लोकतांत्रिक पद्धति को समझ सकते हैं।
प्रो. अमरपाल सिंह ने विद्यार्थियों को जीवन में सत्य, धर्म और स्वाध्याय जैसे आदर्शों का पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान की सार्थकता निरंतर अभ्यास, प्रयास और अनुभव से सिद्ध होती है। विद्यार्थियों को इन अवसरों का सदुपयोग करते हुए तार्किक चिंतन, संवाद कौशल और सामूहिक रूप से समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करनी चाहिए, ताकि वे जिम्मेदार नागरिक के रूप में राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकें।
युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने पर जोर
प्रो. सुनीता मिश्रा ने कहा कि युवा संसद विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझने और अपने विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है। इस प्रकार के आयोजनों से युवाओं में नेतृत्व क्षमता, तार्किक चिंतन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को समाज और राष्ट्र से जुड़े मुद्दों के प्रति जागरूक रहने तथा अपने ज्ञान और विचारों के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
भारतीय ज्ञान परंपरा में भी निहित हैं सतत विकास के विचार: प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा
कार्यक्रम संयोजक एवं सतत विकास लक्ष्य समिति के अध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने कहा कि सतत विकास की अवधारणा भारतीय ज्ञान परंपरा में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मौजूद है। वेदों, गीता और पुराणों में प्रकृति संरक्षण, संसाधनों के संतुलित उपयोग और समाज के कल्याण से जुड़े विचार इस दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में नेतृत्व करना भारत की स्वाभाविक आवश्यकता है। युवा संसद का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच इन लक्ष्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें समाज की वास्तविक चुनौतियों को समझने के लिए प्रेरित करना है।
प्रो. अरोड़ा के अनुसार, विश्वविद्यालय में इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समावेशन, स्वास्थ्य एवं कल्याण और जिम्मेदार उपभोग जैसे विषयों को समझने का अवसर मिलता है। इससे विद्यार्थियों में सामाजिक समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता, नवाचार, नेतृत्व क्षमता और समाधान-आधारित दृष्टिकोण विकसित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक ज्ञान का उपयोग समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान और सतत विकास की दिशा में सार्थक योगदान देने के लिए करना चाहिए।

शीर्ष 10 प्रतिभागियों को अगले स्तर की प्रतियोगिता में मिलेगा अवसर
युवा संसद में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने सम्मानित किया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शीर्ष 10 विजेताओं को अगले स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।
आयोजन की सफलता में विश्वविद्यालय के सस्टेनेबल डेवलपमेंट चैंपियंस का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति की ओर से मुख्य अतिथि और शिक्षकों को स्मृति चिह्न भेंट कर आभार व्यक्त किया गया। डॉ. पद्म जी. ओमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी, प्रतिभागी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
बीबीएयू में आयोजित प्रथम युवा संसद-2026 ने विद्यार्थियों को सतत विकास लक्ष्यों, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व पर विचार साझा करने का मंच प्रदान किया। इस पहल के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षा के साथ सामाजिक जागरूकता और समाधान-केंद्रित सोच को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।




