मऊ। दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए आने-जाने में होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश ने ई-ट्राइसाइकिल योजना के तहत आवेदन आमंत्रित किए हैं। जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी शशांक श्रीवास्तव ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य गंभीर दिव्यांगता से प्रभावित छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें विद्यालय, महाविद्यालय तथा प्रशिक्षण संस्थानों तक सुगमता से पहुंचने की सुविधा उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत पात्र छात्राओं को अधिकतम 65 हजार रुपये तक की लागत वाली ई-ट्राइसाइकिल निःशुल्क प्रदान की जाएगी, जिससे वे अपनी दैनिक शैक्षिक गतिविधियों में बिना किसी बाधा के भाग ले सकें।
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ केवल उन दिव्यांग छात्राओं को मिलेगा जिनकी आयु 16 वर्ष या उससे अधिक है और जो किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय, महाविद्यालय या प्रशिक्षण संस्थान में अध्ययनरत हैं। आवेदन करने वाली छात्राओं को चिकित्सा बोर्ड द्वारा पात्र घोषित किया जाना अनिवार्य होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि संबंधित छात्रा ई-ट्राइसाइकिल चलाने में सक्षम हो, ताकि वाहन का सुरक्षित और प्रभावी उपयोग किया जा सके। विभाग के अनुसार, यह योजना विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी जिन्हें शारीरिक अक्षमता के कारण आवागमन में अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी ने स्पष्ट किया कि योजना का लाभ निर्धारित आय सीमा वाले परिवारों की छात्राओं को ही दिया जाएगा। आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों के आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, जिन विद्यार्थियों को पिछले पांच वर्षों के भीतर ई-ट्राइसाइकिल प्राप्त हो चुकी है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे। विभाग द्वारा पात्रता की सभी शर्तों की जांच के बाद ही अंतिम चयन किया जाएगा।
श्रीवास्तव ने बताया कि इच्छुक छात्राएं ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकती हैं। आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक दिव्यांग छात्राएं योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों से भी अपील की कि वे पात्र छात्राओं को आवेदन के लिए प्रेरित करें, जिससे उन्हें शिक्षा प्राप्त करने में किसी प्रकार की परिवहन संबंधी समस्या का सामना न करना पड़े। योजना से न केवल छात्राओं की शैक्षिक निरंतरता बनी रहेगी, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और स्वतंत्रता की भावना भी विकसित होगी। अधिक जानकारी के लिए इच्छुक अभ्यर्थी जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी कार्यालय, मऊ से संपर्क कर सकते हैं।




