यह देखते हुए कि अनुमेय सीमा से अधिक कोडीन की तैयारी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत आती है, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में कोडीन कफ सिरप रैकेट मामले में दो आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने अब्दुल कादिर और एक अन्य की जमानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी कि उनके पास से भारी मात्रा में अवैध रूप से उपयोग की जाने वाली कोडीन आधारित कफ सिरप बरामद हुई थी।
कोडीन आधारित कफ सिरप की 11,885 बोतलों वाली 119 पेटियों को अवैध रूप से रखने के लिए रामपुर जिले के कोतवाली पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस अधिनियम, 1985 और बीएनएस, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जो उन्हें एक कार में लोड करते समय उनके पास से बरामद हुई थी।
जमानत के लिए आवेदन करते हुए यह तर्क दिया गया कि आवेदक लाइसेंस प्राप्त दवा विक्रेता थे और उन्होंने वैध चालान के माध्यम से कफ सिरप खरीदा था। यह दलील देने के अलावा कि आवेदकों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, यह प्रस्तुत किया गया कि ड्रग इंस्पेक्टर के पास नमूने एकत्र करने और सील करने का कोई अधिकार नहीं था।
अदालत ने पाया कि ‘कोडीन’ (मिथाइल-मॉर्फिन) और इसके लवण, सभी तनुकरण और तैयारियों को 14 नवंबर, 1985 की केंद्र सरकार की अधिसूचना में आइटम नंबर 35 पर निर्मित दवा के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। कोडीन को एक दवा के रूप में केवल तभी छूट दी गई थी जब इसका उपयोग चिकित्सीय अभ्यास में किया गया था और यदि खुराक में इसका उपयोग 100 मिलीग्राम से कम और अविभाजित तैयारी में 2.5% से अधिक की एकाग्रता के साथ नहीं किया गया था।
अदालत ने माना कि आवेदकों ने उपरोक्त अधिसूचना में दिए गए अपवाद का उल्लंघन किया है और वे इसके लाभ का दावा करने से वंचित हैं। यह देखते हुए कि आरोपी आवेदकों के पास से कोडीन आधारित कफ सिरप की 11,885 बोतलें बरामद की गईं, अदालत ने कहा, “आवेदक/आरोपी व्यक्तियों को झूठा फंसाने का कोई कारण नहीं पाया गया। इसलिए, इस स्तर पर आवेदक-आरोपी व्यक्तियों को जमानत पर रिहा करने का कोई अच्छा आधार नहीं है।
अदालत ने 3 फरवरी के अपने आदेश में कहा, “आवेदक के वकील द्वारा उठाए गए सभी तर्क मामले की योग्यता से संबंधित हैं और जमानत देने के लिए आवेदन पर विचार करते समय उन पर विचार नहीं किया जा सकता है। यह अदालत इस स्तर पर यह राय बनाने में असमर्थ है कि आरोपी व्यक्तियों ने कोई अपराध नहीं किया है।”




