नई दिल्ली: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह देश के सबसे सुंदर और प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों में से एक माना जाता है। हाल ही में पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन द्वीपों में जलवायु परिवर्तन, समुद्र स्तर में वृद्धि और प्लास्टिक प्रदूषण के कारण पर्यावरणीय खतरे बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्र के पानी का स्तर बढ़ने और भारी बारिश की घटनाओं से द्वीपों के कोरल रीफ और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, द्वीपों पर बढ़ता पर्यटन भी प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डाल रहा है। पर्यावरणविद कहते हैं कि उचित प्रबंधन और सतत पर्यटन नीतियों के बिना यह प्राकृतिक खजाना खतरे में पड़ सकता है।
सरकार ने पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इन पहलों में स्मार्ट पर्यटन, पर्यावरण जागरूकता अभियान और स्थानीय समुद्री जीवन संरक्षण प्रोजेक्ट शामिल हैं। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों को चेतावनी दी है कि वे द्वीपों पर कचरा न फैलाएँ और समुद्री जीवन को सुरक्षित रखने के नियमों का पालन करें।
पर्यावरणविदों का यह भी कहना है कि स्थानीय समुदाय और सरकार के सहयोग से ही द्वीपों की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता को बचाया जा सकता है। आने वाले वर्षों में यदि सतत पर्यावरण नीतियाँ अपनाई जाएँ तो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह न केवल पर्यटन के लिए आकर्षक बने रहेंगे, बल्कि वहां के प्राकृतिक संसाधनों और समुद्री जीवन की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

