मऊ- गांव-गिरांव में कहावत है—“काम में ढिलाई हो तो डांट पड़ना तय है।” कुछ ऐसा ही नजारा डूडा की बैठक में देखने को मिला। पीएम स्वनिधि योजना की धीमी रफ्तार के आंकड़े सामने आते ही जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने बैंकों और जिम्मेदार अफसरों की जमकर खबर ली। हाल यह है कि जिले में रोजाना औसतन सिर्फ 10 कर्ज आवेदन ही मंजूर हो रहे हैं। यूनियन बैंक में 289, एसबीआई में 221, बड़ौदा यूपी बैंक में 196 और बैंक ऑफ बड़ौदा में 107 आवेदन मंजूरी की राह देख रहे हैं। मऊनाथ भंजन में 2,881 और कोपागंज में 636 आवेदन लंबित हैं। जिले को 19,275 आवेदनों का लक्ष्य मिला था, मगर अब तक 14,645 को ही मंजूरी मिल सकी है। यानी 4,630 आवेदन अभी भी फाइलों में धूल फांक रहे हैं। डीएम ने दो टूक कहा कि गरीबों को योजना का लाभ दिलाने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। इस महीने बैंकिंग व्यवस्था नहीं सुधरी तो कार्रवाई तय है। जरूरत पड़ी तो जिले में संबंधित बैंक की गतिविधियां बंद कराने तक की चेतावनी दी गई। कम काम करने वाले दो अधिशासी अधिकारियों को नोटिस और वेतन रोकने के निर्देश भी दिए गए। वहीं पीएम आवास योजना में पात्र लोगों का सही सत्यापन और जियो टैगिंग जल्द पूरी कराने को कहा गया। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, अधिशासी अधिकारी न.प. एवं लीड बैंक मैनेजर उपस्थित रहे।
डीएम की बैठक में खुली बैंकों की पोल, गरीबों का कर्ज अटकाया तो अफसरों पर गिरेगी गाज



