एचसी ने अंतरिम राहत दी, डीएलएड ओडीएल शिक्षकों को यूपी टीईटी 2026 में उपस्थित होने की अनुमति दी

The Lucknow bench of the Allahabad high court pass 1777058913437
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने शुक्रवार को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) से ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा में 18 महीने का डिप्लोमा (डी.एल.एड.) रखने वाले उत्तर प्रदेश के हजारों सेवारत शिक्षकों को अंतरिम राहत दी। एक अंतरिम आदेश में, अदालत ने उन्हें याचिका पर अंतिम निर्णय के अधीन, उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) 2026 में उपस्थित होने की अनुमति दी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश पारित किया. (फाइल फोटो)
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को अंतरिम आदेश पारित किया. (फाइल फोटो)

“ऐसी परिस्थितियों में, प्रतिवादी नंबर 2 को निर्देश दिया जाता है कि याचिकाकर्ताओं और अन्य समान स्थिति वाले उम्मीदवारों को यूपी-टीईटी परीक्षा, 2026 में अनंतिम रूप से उपस्थित होने की अनुमति दी जाए, बशर्ते कि वे उन मानदंडों को पूरा करते हों कि वे 10.08.2017 को या उससे पहले कार्यरत थे और उनके पास D.El.Ed.-ODL में 18 महीने का डिप्लोमा है। हालांकि, उनका विचार इस याचिका के अंतिम परिणाम के अनुरूप होगा,” अदालत ने अपने आदेश में कहा।

न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश शुभम कुमार शुक्ला समेत 36 ऐसे शिक्षकों की याचिका पर दिया. याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा में उनकी भागीदारी को अस्वीकार करना सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में जारी स्पष्टीकरण के विपरीत था।

याचिकाकर्ताओं के वकील रजत राजन सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ओडीएल डिप्लोमा धारकों को राज्य में शिक्षण नियुक्तियों के लिए अनिवार्य योग्यता परीक्षा यूपीटीईटी 2026 के लिए पात्रता से वंचित किया जा रहा है। इसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत से आग्रह किया कि जो उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट के मानदंडों को पूरा करते हैं – जो 10 अगस्त, 2017 तक सेवा में थे और 18 महीने का ओडीएल डिप्लोमा पूरा कर चुके थे – उन्हें टीईटी में भाग लेने से वंचित करना कई न्यायिक निर्णयों में जारी बाध्यकारी निर्देशों के विपरीत था।

कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार, परीक्षा आयोग और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को अपना-अपना हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है.

मामले में अगली सुनवाई 22 मई को होगी.

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