मऊ- जिला चिकित्सालय, मऊ में मरीज इलाज कराने आते हैं, लेकिन अस्पताल परिसर में खड़ा एक जर्जर बिजली का खंभा खुद बीमारी से कम और खतरे से ज्यादा भरा नजर आ रहा है। लोहे का यह पोल नीचे से इस कदर गल चुका है कि देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसकी उम्र अब जवाब दे चुकी है। गांव-देहात में लोग अक्सर कहते हैं कि ‘जब तक छप्पर सिर पर न गिरे, तब तक मरम्मत की सुध नहीं आती।’ अस्पताल के इस पोल की हालत भी कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही है। इसी रास्ते से रोज मरीज, तीमारदार, डॉक्टर, कर्मचारी और आम लोग गुजरते हैं। ऐसे में अगर पोल अचानक भरभराकर गिर पड़ा तो जिम्मेदारी किसकी होगी? लोगों का कहना है कि हादसा होने के बाद जांच-पड़ताल और कागजी कार्रवाई से बेहतर है कि खतरे को पहले ही दूर कर दिया जाए। विद्युत विभाग और अस्पताल प्रशासन को चाहिए कि मौके का निरीक्षण कर इस पोल को तत्काल हटाकर नया पोल लगवाएं। साथ ही परिसर के बाकी बिजली के खंभों की भी जांच कराई जाए। क्योंकि सवाल यह नहीं है कि हादसा होगा या नहीं, सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग हादसे से पहले जागेंगे या हादसे के बाद।





