इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में नृत्य विभाग में प्रोफेसर के पद के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी द्वारा अपनाई गई कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) पदोन्नति प्रक्रिया को रद्द करते हुए एक विशेष अपील की अनुमति दी।

न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की पीठ ने नृत्य विभाग में एक एसोसिएट प्रोफेसर दीपानविता सिंह रॉय द्वारा दायर विशेष अपील को स्वीकार कर लिया, जिन्होंने सीएएस पैनल के संविधान और प्रक्रिया को चुनौती देने वाली उनकी रिट को एकल न्यायाधीश द्वारा खारिज करने के बाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
अदालत ने 16 फरवरी के अपने आदेश में प्रतिवादी नंबर 6-डॉ विधि नागर- के चयन को भी रद्द कर दिया, जिन्हें नृत्य (कथक) में व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, नियमों के अनुसार प्रमोशन पैनल में बाहरी विशेषज्ञों की नियुक्ति सख्ती से कार्यकारी परिषद द्वारा की जानी चाहिए, न कि आपातकालीन धाराओं के तहत अकेले काम करने वाले कुलपति द्वारा।
याचिकाकर्ता के अनुसार, सीएएस पदोन्नति, जो करियर और भविष्य की संभावनाओं को प्रभावित करती है, को उनके स्वभाव से आपातकालीन निर्णय के रूप में नहीं माना जा सकता है। विशेषज्ञता के सवाल पर, अदालत ने कहा कि पदोन्नति पैनल में रिक्ति के समान विषय के विशेषज्ञ शामिल होने चाहिए।
अदालत ने विशेष अपील की अनुमति देते हुए कहा, “हम मानते हैं कि चयन समिति का गठन कानून में खराब है, और इसलिए, प्रतिवादी नंबर 6 का चयन भी कानून में खराब है। नतीजतन, हम विद्वान एकल न्यायाधीश के फैसले के साथ-साथ प्रोफेसर, नृत्य विभाग, प्रदर्शन कला संकाय, बीएचयू, वाराणसी के पद पर प्रतिवादी नंबर 6 के चयन को रद्द कर देते हैं। हम प्रतिवादी नंबर 3-कुलपति, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी को नए सिरे से चयन करने का निर्देश देते हैं।”




