बीबीएयू में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी से बचाव के बताए तरीके

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लखनऊ, 23 अक्टूबर 2026। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों की चुनौतियों को देखते हुए बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ में शुक्रवार को साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग ने साइबर क्राइम हेडक्वार्टर की टेक्निकल टीम के सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और अन्य कर्मियों को साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव, डेटा संरक्षण तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में जागरूक किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय समुदाय को साइबर अपराधों के बदलते तरीकों से परिचित कराना और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते समय सतर्कता बरतने के लिए प्रेरित करना रहा।

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दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब को पुष्पांजलि के साथ शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ। इसके बाद विश्वविद्यालय कुलगीत का गायन किया गया और आयोजन समिति की ओर से मंचासीन अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।

कार्यक्रम में डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, साइबर क्राइम हेडक्वार्टर की टेक्निकल टीम के श्री मोहसिन खान, यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. शिशिर कुमार, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. धीरेन्द्र पाण्डेय, साइबर सेल के श्री आशीष पाण्डेय और श्री रिषभ कौशिक उपस्थित रहे।

डॉ. मंगलदीप गुप्ता ने उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। इसके बाद प्रो. शिशिर कुमार ने कार्यक्रम के उद्देश्य और रूपरेखा की जानकारी दी। उत्तर प्रदेश साइबर सेल के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने संसाधन व्यक्तियों के रूप में प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

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कुलपति बोले—तकनीक के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए जागरूकता जरूरी

कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटलाइजेशन, विशेषकर ऑनलाइन लेन-देन, ने भारत के विकास को नई दिशा दी है। डिजिटल तकनीक ने आमजन के जीवन को सरल बनाने के साथ आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को गति प्रदान की है। हालांकि, प्रत्येक तकनीक के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू होते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि तकनीक का उपयोग समझदारी से किया जाए और उससे जुड़े संभावित जोखिमों के प्रति सतर्क रहा जाए।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों से बचने के लिए जागरूकता बेहद आवश्यक है। व्यक्ति को लालच, दबाव और जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेने से बचना चाहिए। किसी आकर्षक ऑफर, संदिग्ध संदेश या डिजिटल गतिविधि पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसके संभावित परिणामों और जोखिमों पर विचार करना चाहिए।

प्रो. मित्तल ने साइबर अपराध से प्रभावित लोगों को समय पर मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी सहायता तंत्र की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश सरकार के साइबर सेल के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने की दिशा में प्रयास करना चाहेगा।

प्रस्तावित पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना, डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और साइबर अपराध से जुड़े शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना है। इससे विद्यार्थियों की तकनीकी समझ विकसित होने के साथ समाज में साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।

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डिजिटल दुनिया में व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा जरूरी: प्रो. एस. विक्टर बाबू

डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी विभिन्न डिजिटल माध्यमों के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी व्यक्तिगत जानकारी और ऑनलाइन गतिविधियों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समय के साथ सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी बदली हैं। जिस प्रकार वास्तविक जीवन में सुरक्षा के प्रति सावधानी जरूरी है, उसी प्रकार डिजिटल दुनिया में बैंकिंग विवरण, निजी जानकारी और ऑनलाइन गतिविधियों को सुरक्षित रखना भी आवश्यक है।

प्रो. बाबू ने साइबर सुरक्षा को केवल तकनीकी विषय मानने के बजाय प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बताया। उनके अनुसार, जागरूकता, सतर्कता और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाकर साइबर अपराधों के जोखिम को कम किया जा सकता है।

फर्जी लिंक, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी से रहें सावधान

साइबर क्राइम हेडक्वार्टर की टेक्निकल टीम के श्री मोहसिन खान ने साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले विभिन्न तरीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जल्दबाजी, जागरूकता की कमी और लालच का फायदा उठाकर अपराधी लोगों को ठगी का शिकार बनाने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने आकर्षक ऑफर, फर्जी लिंक, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन निवेश, केवाईसी अपडेट और बैंकिंग संबंधी धोखाधड़ी जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।

श्री खान ने कहा कि किसी के साथ भी बैंकिंग पासवर्ड, ओटीपी, पिन या अन्य गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध कॉल पर भरोसा करने और बिना सत्यापन के ऑनलाइन भुगतान करने से बचना चाहिए।

उन्होंने साइबर अपराध की जांच में पुलिस की भूमिका के बारे में भी बताया। उनके अनुसार, पुलिस शिकायतों की जांच, डिजिटल साक्ष्यों के संग्रह, संदिग्धों की पहचान और धोखाधड़ी से जुड़े बैंक खातों एवं लेन-देन की जानकारी जुटाने के साथ संबंधित एजेंसियों के समन्वय से पीड़ितों की सहायता करती है।

साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर 1930 पर करें संपर्क

साइबर सेल के श्री आशीष पाण्डेय ने वित्तीय धोखाधड़ी के विभिन्न तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक, ऑनलाइन भुगतान और बैंकिंग से जुड़ी धोखाधड़ी के जरिए अपराधी लोगों की वित्तीय जानकारी का दुरुपयोग कर सकते हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 की जानकारी देते हुए कहा कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत इस नंबर पर संपर्क करना महत्वपूर्ण है। समय रहते शिकायत करने से संबंधित लेन-देन पर आवश्यक कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।

श्री पाण्डेय ने नागरिक-केंद्रित सेवाओं, साइबर स्वच्छता केंद्र, साइबर अपराध शिकायत तंत्र और धोखाधड़ी की राशि वापस प्राप्त करने से संबंधित मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने प्रतिभागियों को साइबर अपराध की स्थिति में उचित शिकायत प्रक्रिया अपनाने और उपलब्ध सहायता तंत्र का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया।

डेटा सुरक्षा से लेकर साइबर कानूनों तक पर हुई चर्चा

कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इनमें उभरते साइबर खतरे, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, डेटा सुरक्षा एवं गोपनीयता, ईमेल और सोशल मीडिया का सुरक्षित इस्तेमाल, साइबर कानून तथा साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शामिल रही।

विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को संदिग्ध संदेशों और लिंक से बचने, निजी एवं वित्तीय जानकारी सुरक्षित रखने और डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदारी से उपयोग करने के उपाय बताए। संवाद सत्र के दौरान प्रतिभागियों को विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछकर साइबर सुरक्षा से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करने का अवसर भी मिला।

कार्यक्रम के अंत में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष एवं संयोजक प्रो. धीरेन्द्र पाण्डेय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, प्रशासनिक एवं तकनीकी कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के माध्यम से डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपाय समझाने और साइबर अपराध की स्थिति में उचित शिकायत तंत्र अपनाने का संदेश दिया गया।

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