₹7,000 की नौकरी करने वाले शक्ति वर्मा को कानपुर सुपरस्टार्स ने ₹2.5 लाख में खरीदा, इकाना में 15 अगस्त को किया UPT20 डेब्यू; अब ग्रीन पार्क में 138 km/h की रफ्तार से दिखा रहे हैं दम
कानपुर/बाराबंकी, 2 सितंबर 2026। कभी महीने के महज ₹7,000 की प्राइवेट नौकरी करने वाले और पंक्चर की दुकान पर काम कर अपने क्रिकेट के सपने को जिंदा रखने वाले बाराबंकी के 23 वर्षीय तेज गेंदबाज शक्ति वर्मा आज यूपी टी20 लीग के मंच पर अपनी रफ्तार का जलवा बिखेर रहे हैं। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच क्रिकेट खेलने वाले शक्ति की जिंदगी में उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) की प्रतिभा खोज पहल ‘स्पीड हंट’ ने ऐसा मोड़ दिया, जिसने उनके क्रिकेट करियर की दिशा ही बदल दी।
शक्ति वर्मा को यूपी टी20 लीग सीजन-4 के प्लेयर ऑक्शन में कानपुर सुपरस्टार्स ने ₹2.50 लाख में अपने साथ जोड़ा। इसके बाद 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लखनऊ के इकाना स्टेडियम में नोएडा किंग्स के खिलाफ उन्होंने कानपुर सुपरस्टार्स की ओर से अपना UPT20 डेब्यू किया। टूर्नामेंट के कानपुर लेग में भी शक्ति लगातार अपनी तेज गेंदबाजी से प्रभावित कर रहे हैं और अब तक तीन मुकाबले खेल चुके हैं।

138 km/h की रफ्तार ने दिलाया बड़ा मंच
शक्ति वर्मा के लिए ‘स्पीड हंट’ महज एक ट्रायल नहीं, बल्कि उनके क्रिकेट करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। UPCA की ओर से आयोजित लखनऊ ट्रायल्स में शक्ति ने 138 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंककर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। वह ट्रायल्स में तीसरे सबसे तेज गेंदबाज रहे।
इसके बाद उनकी प्रतिभा पर फ्रेंचाइजियों की नजर गई और यूपी टी20 लीग के ऑक्शन में कानपुर सुपरस्टार्स ने उन्हें ₹2.5 लाख में खरीदा। जिस खिलाड़ी के लिए क्रिकेट के जरूरी सामान जुटाना भी मुश्किल था, उसके लिए यह रकम सिर्फ एक ऑक्शन प्राइस नहीं, बल्कि अपने सपने को आगे बढ़ाने का बड़ा अवसर बन गई।
‘स्पीड हंट’ के निशुल्क ट्रायल्स ने खोला रास्ता
शक्ति वर्मा का मानना है कि अगर स्पीड हंट के ट्रायल्स निशुल्क नहीं होते तो उनके जैसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले खिलाड़ियों के लिए इतने बड़े मंच तक पहुंचना बेहद मुश्किल होता।
शक्ति ने कहा, “जो परिवार समर्थ हैं, उनके लिए ₹1,500 की फीस कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन एक सामान्य लड़के के लिए ₹10 भी बहुत ज्यादा होते हैं। ट्रायल्स फ्री होने की वजह से हम जैसे ग्रामीण और गरीब लड़कों को इतना बड़ा बूस्ट मिला। अगर स्पीड हंट हर साल होता है, तो नीचे से और भी बेहतरीन प्रतिभाएं निकलकर सामने आएंगी।”
उनकी कहानी इस बात को भी सामने लाती है कि प्रतिभा अगर सही मंच और अवसर से जुड़ जाए तो आर्थिक सीमाएं उसके रास्ते की सबसे बड़ी बाधा नहीं रह जातीं।
₹7,000 की नौकरी में ₹7,000 के क्रिकेट जूते खरीदना भी मुश्किल था
शक्ति वर्मा का बचपन और शुरुआती क्रिकेट सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। उनके पिता अमर सिंह वर्मा स्थानीय मोटर मैकेनिक हैं। परिवार में सबसे बड़े होने के कारण शक्ति ने कम उम्र से ही जिम्मेदारियां उठाईं और क्रिकेट के साथ नौकरी भी की।
शक्ति अपने संघर्ष को याद करते हुए बताते हैं कि क्रिकेट उनके लिए हमेशा आसान खेल नहीं रहा। उन्होंने कहा, “क्रिकेट बहुत महंगा खेल है। मैं ₹7,000 की प्राइवेट नौकरी करता था, तो उसमें ₹7,000 का क्रिकेट जूता कैसे खरीदता?”
उन्होंने बताया कि शुरुआत में वह टेनिस बॉल क्रिकेट खेलते थे और बल्लेबाजी करना चाहते थे। बाद में उनके कोच सरवन नवाब ने उनकी गेंदबाजी में प्रतिभा पहचानी और उसे निखारने पर काम किया। शक्ति के अनुसार उनके कोच के साथ-साथ उनके सीनियर विप्रज निगम और शिवम भाई ने भी मुश्किल समय में उनकी आर्थिक और नैतिक मदद की।
यही सहयोग धीरे-धीरे शक्ति को उस मुकाम तक लेकर गया, जहां आज वह बड़े खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा कर रहे हैं।
समीर रिजवी और IPL सितारों के साथ ड्रेसिंग रूम का अनुभव
जिस क्रिकेटर के लिए कभी क्रिकेट के जूते खरीदना भी चुनौती था, वही शक्ति आज यूपी टी20 लीग के ड्रेसिंग रूम में समीर रिजवी, मोहसिन खान और कर्ण शर्मा जैसे खिलाड़ियों के साथ समय बिता रहे हैं।
उनके लिए यह बदलाव सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और पेशेवर रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है। घरेलू क्रिकेट के बड़े मंच पर खेलना और अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना शक्ति को अपने खेल को समझने और निखारने का अवसर दे रहा है।
डॉ. संजय कपूर बोले—बिना फीस और सिफारिश के मंच तक पहुंचना बड़ी उपलब्धि
स्पीड हंट से निकलकर मुख्यधारा में पहुंचे युवा खिलाड़ियों की सफलता पर यूपी टी20 लीग गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन डॉ. संजय कपूर ने खुशी जताई।
उन्होंने कहा, “चाहे शक्ति वर्मा हों, शुभम हों या फिर कृष्णा सरोज… जब ऐसे होनहार और संघर्षशील खिलाड़ियों को यह मंच मिलता है, तो वे अपनी कड़ी मेहनत से आगे बढ़ते हैं। यही खिलाड़ी आने वाले समय में आईपीएल और भारतीय क्रिकेट टीम में अपनी जगह बनाएंगे।”
डॉ. संजय कपूर ने कहा कि शक्ति जैसे खिलाड़ियों को बिना किसी फीस और सिफारिश के सीधे स्पीड हंट के जरिए इतनी बड़ी लीग तक पहुंचाना अभियान की बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा, “खुद पंक्चर की दुकान पर काम करने वाले शक्ति जैसे बच्चों को बिना किसी फीस या सिफारिश के सीधे स्पीड हंट के जरिए इतनी बड़ी लीग तक पहुंचाना ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।”
ऑक्शन के ₹2.5 लाख ने परिवार को दी बड़ी राहत
कानपुर सुपरस्टार्स द्वारा ₹2.5 लाख में खरीदे जाने के बाद शक्ति के परिवार के लिए भी आर्थिक राहत का रास्ता खुला है। शक्ति का कहना है कि इस रकम का इस्तेमाल वह अपनी ट्रेनिंग और खुद को बेहतर बनाने के लिए करना चाहते हैं।
शक्ति ने कहा, “इस प्लेटफॉर्म से जो पैसे मिले हैं, उन्हें हम अपनी ट्रेनिंग और खुद को बेहतर बनाने में इस्तेमाल करेंगे। हम जैसे सामान्य परिवारों के लिए यह रकम बहुत बड़ी है। सच बताऊं तो मैंने अपनी पूरी जिंदगी में एक साथ कभी इतने पैसे नहीं देखे थे।”
उनके इस बयान से अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक युवा खिलाड़ी के लिए यह रकम कितनी बड़ी उपलब्धि है। हालांकि शक्ति के लिए असली लक्ष्य सिर्फ ऑक्शन की रकम तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपनी रफ्तार को और धार देकर बड़े क्रिकेट मंच पर पहचान बनाने का सपना देख रहे हैं।

ग्रीन पार्क में 138 km/h की रफ्तार से उम्मीदों को दे रहे पंख
इकाना स्टेडियम में 15 अगस्त को UPT20 डेब्यू करने के बाद शक्ति अब टूर्नामेंट के कानपुर चरण में ग्रीन पार्क स्टेडियम में अपनी गेंदबाजी से प्रभावित कर रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी गति है और 138 km/h तक की रफ्तार ने उन्हें लीग में एक ऐसे युवा तेज गेंदबाज के रूप में पहचान दिलाई है, जिस पर भविष्य में नजर रहेगी।
शक्ति के लिए यह सफर अभी शुरुआत है। पंक्चर की दुकान और ₹7,000 की नौकरी से शुरू हुआ सफर अब यूपी टी20 लीग के बड़े मंच तक पहुंच चुका है। उनके सामने अब अपनी गति को बरकरार रखने, गेंदबाजी में विविधता लाने और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती है।
अब IPL और टीम इंडिया है अगला सपना
बाराबंकी के ग्रामीण अंचल से निकलकर कानपुर के ग्रीन पार्क तक पहुंचे शक्ति वर्मा अब इससे भी बड़ा सपना देख रहे हैं। उनका लक्ष्य भविष्य में आईपीएल और भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंचना है।
शक्ति ने UPCA, राजीव शुक्ला और डॉ. संजय कपूर का धन्यवाद करते हुए कहा कि स्पीड हंट ने उन खिलाड़ियों के लिए आईपीएल और राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने के रास्ते खोले हैं, जो संसाधनों की कमी के कारण कई बार अपना सपना बीच में ही छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं।
शक्ति वर्मा की कहानी सिर्फ एक तेज गेंदबाज के UPT20 तक पहुंचने की कहानी नहीं है। यह उस प्रतिभा की कहानी है, जिसे अवसर मिलने का इंतजार था। एक पंक्चर की दुकान से शुरू हुआ संघर्ष, 138 km/h की रफ्तार और ₹2.5 लाख का ऑक्शन—इन सबने मिलकर बाराबंकी के इस युवा क्रिकेटर के सपने को नई उड़ान दे दी है।




