मऊ- 14 अगस्त को नगर पालिका कम्युनिटी हॉल में लगी तस्वीरों की प्रदर्शनी को देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे बरसों पुराना इतिहास आज फिर सामने आ खड़ा हुआ हो। किसी तस्वीर में घर छोड़कर जाते लोग थे तो किसी में अपनों से बिछड़ने का दर्द। पुराने दस्तावेजों में दर्ज घटनाएं उस दौर की कहानी कह रही थीं, जब देश के बंटवारे ने लाखों परिवारों की जिंदगी बदल दी थी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने फीता काटकर किया। उद्घाटन के बाद मंत्री ने प्रदर्शनी में लगे चित्रों और अभिलेखों को एक-एक कर देखा। तस्वीरों के जरिए उन्होंने उस दर्द को महसूस किया, जिसे विभाजन के समय घर-बार छोड़ने वाले परिवारों ने झेला था। इसी मौके पर नगर पालिका कम्युनिटी हॉल में श्रद्धांजलि कार्यक्रम भी हुआ। विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन की पीड़ा सहने वाले परिवारों की याद में दो मिनट का मौन रखा गया। कुछ पल के लिए पूरा परिसर शांत हो गया और उस खामोशी में उन लाखों लोगों की पीड़ा जैसे महसूस होती रही, जो इतिहास के उस कठिन दौर के शिकार बने। मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि आजादी का जश्न मनाते समय देश के विभाजन की पीड़ा को भूलना नहीं चाहिए। लाखों लोगों ने उस समय अपने घर, जमीन और अपनों को खोया। उन्होंने कहा कि इस दिन को मनाने का उद्देश्य किसी के मन में कड़वाहट पैदा करना नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेकर आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर भविष्य तैयार करना है। उन्होंने कहा कि गांव-घर के बच्चों और नई पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि देश ने आजादी के सफर में कितना दर्द सहा है। विभाजन की त्रासदी हमें यह सीख देती है कि आपसी भाईचारा, सद्भाव और देश की एकता हर हाल में मजबूत रहनी चाहिए। कार्यक्रम के बाद मंत्री के नेतृत्व में कम्युनिटी हॉल से मौन जुलूस निकाला गया। बिना किसी नारे और शोर के आगे बढ़ते इस जुलूस में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, स्कूली बच्चों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया। जुलूस की खामोशी ही अपने आप में एक संदेश दे रही थी—विभाजन का दर्द भले ही इतिहास का हिस्सा बन गया हो, लेकिन उससे मिली सीख को कभी भुलाया नहीं जाना चाहिए। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष, मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, समेत जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, अधिकारी-कर्मचारी और नागरिक मौजूद रहे।
विभाजन की पीड़ा को याद कर शहीदों और विस्थापितों को किया नमन, दो मिनट के मौन और मौन जुलूस से दी गई विभाजन पीड़ितों को श्रद्धांजलि







