कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर प्रतिबंध को बरकरार रखा और ईद अल-अधा से पहले वध को विनियमित करने वाले पश्चिम बंगाल सरकार के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन सहित उच्च न्यायालय की एक पीठ ने सार्वजनिक स्थानों पर गायों और भैंसों के वध पर सख्ती से रोक लगा दी।
अदालत ने कहा कि गाय की बलि किसी भी धार्मिक उत्सव का हिस्सा नहीं है, साथ ही सार्वजनिक स्थान पर जानवरों का वध करना सख्त वर्जित है।
अदालत के आदेश में कहा गया, “किसी भी खुले सार्वजनिक स्थान पर गाय और भैंस सहित जानवरों का वध करना सख्त वर्जित है। दूसरे, गाय की बलि आईडी-उज़-ज़ोहा के त्योहार का हिस्सा नहीं है और यह इस्लाम के तहत धार्मिक आवश्यकता नहीं है, जैसा कि मोहम्मद हनीफ कुरेशी और अन्य बनाम बिहार राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था।”
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