मऊ जिले में मनरेगा (विकसित भारत–गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन) के कार्यों की निगरानी कर्मचारियों की भारी कमी से प्रभावित हो रही है। एक ग्राम सचिव के जिम्मे 7 से 13 और एक जूनियर इंजीनियर के जिम्मे 12 से 19 ग्राम पंचायतों का कार्यभार होने से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और नियमित निरीक्षण पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रिक्त पदों के कारण विकास कार्यों की निगरानी कमजोर हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सचिवों और जूनियर इंजीनियरों की जल्द नियुक्ति से पारदर्शिता बढ़ेगी, गुणवत्ता सुधरेगी और ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
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छत्तीसगढ़ कैबिनेट के ‘चिंतन शिविर’ में नेतृत्व, एआई, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर रहा फोकस
शनिवार को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रायपुर में छत्तीसगढ़ कैबिनेट के ‘चिंतन शिविर’ के तीसरे संस्करण की शुरुआत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और शासन […]
