लखनऊ के प्रतिष्ठित PGI संस्थान में एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर दो महीने तक न्याय के लिए सिस्टम से लड़ती रही, लेकिन उसे इंसाफ के बदले केवल तारीखें और धमकियां मिलीं। आरोपी रेजिडेंट द्वारा शारीरिक शोषण, मारपीट और जातिसूचक गालियों से तंग आकर पीड़िता ने आत्महत्या का प्रयास तक किया, फिर भी पुलिस और विशाखा कमेटी मौन रही। जानिए कैसे एक डॉक्टर को रसूख और पुलिसिया लापरवाही ने नशे और अवसाद की गर्त में धकेल दिया, और 60 दिनों की जद्दोजहद के बाद आखिर कैसे दर्ज हुई FIR।
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‘न्याय में देरी न्याय को नष्ट करने के समान है’: सीजेआई कांत ने सतर्क उच्च न्यायालयों से आह्वान किया
मुंबई: यह रेखांकित करते हुए कि न्याय में देरी इसकी नींव को नष्ट कर देती है, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को […]
सीजेआई सूर्यकांत| भारत समाचार
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्याय में देरी न्याय को नष्ट करने के समान है, उन्होंने न्याय प्रदान करने […]