एनएचएआई ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने से इनकार किया, केवल सतह पर फिसलन की बात कही

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने रविवार को स्पष्ट किया कि हाल ही में उद्घाटन किए गए लखनऊ-कानपुर ग्रीनफील्ड एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक खंड के धंसने […]

एक जेई के कंधों पर 19 गांवों का बोझ, फिर कैसे होगी मनरेगा कार्यों की निगरानी? अधिकारियों पर कई गुना कार्यभार, ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा योजनाओं का पूरा लाभ

मऊ जिले में मनरेगा (विकसित भारत–गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन) के कार्यों की निगरानी कर्मचारियों की भारी कमी से प्रभावित हो रही है। एक ग्राम सचिव के जिम्मे 7 से 13 और एक जूनियर इंजीनियर के जिम्मे 12 से 19 ग्राम पंचायतों का कार्यभार होने से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और नियमित निरीक्षण पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रिक्त पदों के कारण विकास कार्यों की निगरानी कमजोर हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सचिवों और जूनियर इंजीनियरों की जल्द नियुक्ति से पारदर्शिता बढ़ेगी, गुणवत्ता सुधरेगी और ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।