लखनऊ। मिट्टी के स्वास्थ्य और उर्वरता को बनाए रखने के साथ खेती को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद विकासखंड स्थित ग्राम अटौरा में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। आईसीएआर-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएफजीआर) और आईएसआरआई कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 77 किसानों ने भाग लिया। इनमें 40 महिला और 37 पुरुष किसान शामिल रहे।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को मिट्टी के संरक्षण, उसकी उर्वरता बनाए रखने और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि स्वस्थ मिट्टी टिकाऊ कृषि उत्पादन की बुनियाद है। यदि मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखना है, तो खेती में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना आवश्यक है।

मिट्टी की उर्वरता बचाने के लिए वैज्ञानिक खेती पर जोर
‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य और उर्वरता का संरक्षण करते हुए कृषि भूमि की उत्पादकता को टिकाऊ बनाए रखना है। कार्यक्रम में किसानों को फसल चक्र अपनाने, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
विशेषज्ञों ने किसानों को खेती में मिट्टी की गुणवत्ता को प्राथमिकता देने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की सलाह दी। कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर खेती करने से कृषि उत्पादन को टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।
मत्स्य पालन के साथ समन्वित खेती अपनाने की सलाह
एनबीएफजीआर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रविन्द्र कुमार ने किसानों को मत्स्य पालन युक्त समन्वित खेती यानी इंटीग्रेटेड फार्मिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने खेती के साथ मत्स्य पालन को जोड़कर कृषि गतिविधियों को विविधता देने और आमदनी बढ़ाने की संभावनाओं पर ध्यान दिलाया।
वहीं, एनबीएफजीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुतोष परिया ने किसानों को वैज्ञानिक मत्स्य पालन की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने मत्स्य पालन से जुड़ी तकनीकी जानकारी साझा की, ताकि किसान इस क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कम जगह में रंगीन मछलियों का पालन कर बढ़ा सकते हैं आय
कार्यक्रम में डॉ. मोनिका गुप्ता ने रंगीन मछलियों यानी एक्वेरियम फिश पालन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कम क्षेत्रफल में भी रंगीन मछलियों का पालन आय का एक संभावित विकल्प हो सकता है।
इस जानकारी के जरिए किसानों को पारंपरिक कृषि गतिविधियों के साथ अन्य आजीविका विकल्पों पर भी विचार करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में खेती और मत्स्य पालन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आय के अवसर तलाशने पर जोर दिया गया।
मलिहाबाद के किसानों को आम की आधुनिक खेती की जानकारी
मलिहाबाद आम उत्पादन के लिए जाना जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. अखिलेश कुमार दुबे ने किसानों को आम की आधुनिक खेती के बारे में मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से परिचित कराने पर ध्यान केंद्रित किया, ताकि क्षेत्र के किसान अपनी प्रमुख कृषि गतिविधियों में वैज्ञानिक जानकारी का उपयोग कर सकें। कार्यक्रम में स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप खेती को बेहतर बनाने और उत्पादन को टिकाऊ रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

सरकारी योजनाओं की भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम में ए.डी.ओ. कृषि सिकन्दर यादव ने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किसानों को योजनाओं के प्रति जागरूक करने का उद्देश्य उन्हें उपलब्ध सरकारी सहायता और सुविधाओं से परिचित कराना रहा।
विशेषज्ञों ने पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों और वैकल्पिक आजीविका गतिविधियों को अपनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। कार्यक्रम में महिला किसानों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। कुल 77 प्रतिभागियों में 40 महिलाएं शामिल थीं।
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यक्रम का समापन किसानों के संकल्प के साथ हुआ। किसानों ने मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रयास करने तथा कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों से मिली जानकारी को अपने खेतों में लागू करने की प्रतिबद्धता जताई।
‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से किसानों को यह संदेश दिया गया कि मिट्टी की सेहत बनाए रखना, वैज्ञानिक खेती अपनाना और कृषि के साथ आय के अन्य विकल्पों की जानकारी हासिल करना टिकाऊ कृषि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।




