लखनऊ। राजधानी के जोन-2 स्थित रायबरेली रोड, चरन भट्टा मार्ग पर नियमों को ताक पर रखकर खड़ा किया गया अवैध वाणिज्यिक ‘किला’ आखिरकार सरकारी कार्रवाई की जद में आ ही गया। स्थानीय निवासियों के कड़े संघर्ष और ‘खबर’ के व्यापक असर के बाद, मंगलवार 17 फरवरी 2026 को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की कुंभकर्णी नींद तब टूटी जब मामले की गूंज मुख्यमंत्री दरबार तक जा पहुंची। शासन के कड़े रुख के बाद हरकत में आए एलडीए के दस्ते ने भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर पीडब्लूडी में कार्यरत रसूखदार बिल्डर वेद प्रकाश यादव द्वारा निर्मित अवैध परिसर को पूरी तरह सील कर दिया। यह कार्रवाई उन भ्रष्ट अधिकारियों के मुंह पर भी करारा तमाचा है, जिनकी ‘खामोश छत्रछाया’ में सरकारी जमीन को निगलने और मानचित्र स्वीकृत कराए बिना आलीशान इमारत खड़ी करने का काला खेल महीनों से बेखौफ चल रहा था। हरदास रेजिडेंसी के निवासियों ने सबूतों के साथ आरोप लगाया था कि बिल्डर ने न केवल 2750 वर्ग फुट के भूखंड पर बिना किसी स्वीकृत मानचित्र, फायर एनओसी या पार्किंग व्यवस्था के निर्माण कराया, बल्कि सार्वजनिक उपयोग की महज 25 फुट चौड़ी सड़क का 5 फुट दायरा भी नाली निर्माण के नाम पर अवैध रूप से दबा लिया। सीलिंग की इस बड़ी कार्रवाई ने उन खोखले दावों की भी पोल खोल दी है जिसमें बिल्डर स्वयं को नियम-कायदों का पाबंद बता रहा था, जबकि हकीकत में बिना सेप्टिक टैंक के गंदगी सीधे नालियों में बहाने की योजना ने पूरे इलाके के स्वास्थ्य को खतरे में डाल दिया था। एलडीए की इस ‘देर आयद दुरुस्त आयद’ कार्रवाई से इलाके के रसूखदार अवैध निर्माणकर्ताओं में हड़कंप मच गया है, और अब जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस अवैध ढांचे पर योगी सरकार का बुलडोजर चलेगा या फिर जांच की फाइलें लाल फीताशाही की भेंट चढ़ जाएंगी।
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