मंत्री ए.के. शर्मा ने पत्रकारों को बताया लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ, समस्याओं के समाधान का दिया भरोसा; हास्य, वीर और श्रृंगार रस की कविताओं से देर तक गूंजता रहा सभागार
मऊ रविवार। गांव-गिरांव में एक कहावत मशहूर है कि जहां चार बर्तन होते हैं, वहां खटकते भी हैं, लेकिन जब सुर और ताल का मेल हो जाए तो वही खनक मधुर संगीत बन जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा चंद्रा इंटरनेशनल स्कूल के सभागार में आयोजित पत्रकार मिलन समारोह एवं भव्य कवि सम्मेलन में देखने को मिला। यहां पत्रकारिता की अपेक्षाओं और अधिकारों पर चर्चा हुई तो दूसरी ओर कवियों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से साहित्यिक महफिल में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रदेश सरकार के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्माने पत्रकारों को लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि पत्रकार की कलम केवल घटनाओं का लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं करती, बल्कि उन लोगों की आवाज भी बनती है, जिनकी पीड़ा और फरियाद व्यवस्था के गलियारों तक नहीं पहुंच पाती। उन्होंने पत्रकारों से जनपद की समस्याओं को निष्पक्षता, निर्भीकता और ईमानदारी के साथ उठाने का आह्वान किया। साथ ही आश्वस्त किया कि जनता से जुड़े मुद्दों को उनके संज्ञान में लाए जाने पर उनके समाधान के लिए त्वरित पहल की जाएगी। समारोह के दौरान पत्रकारों ने भी अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं को बेबाकी से मंत्री के सामने रखा।
पत्रकार संकुल की स्थापना, रेल यात्रा सुविधा पास तथा पत्रकारों के हितों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। पत्रकारों ने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में उनकी सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर गंभीरता से विचार किया जाना जरूरी है। मंत्री ने सभी मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। वहीं कार्यक्रम में बनारस, प्रयागराज, बिहार, देवरिया और मऊ से आए कवियों ने हास्य, व्यंग्य, वीर रस, गीत और श्रृंगार की विविध प्रस्तुतियों से श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। कभी हास्य की फुहारों से सभागार ठहाकों से गूंज उठा तो कभी वीर रस की ओजपूर्ण कविताओं ने श्रोताओं में जोश और उत्साह भर दिया। बनारस के चर्चित हास्य कवि डंडाबनारसी ने अपनी चुटीली शैली और धारदार व्यंग्य से खूब वाहवाही बटोरी। उनकी प्रस्तुतियों पर श्रोता हंसते-हंसते लोटपोट होते रहे। नजर इलाहाबादी, भोजपुरी कवि शंकर कैमुरी और अम्बुज ने भी अपनी हास्य रचनाओं से महफिल में खूब रंग जमाया। वहीं प्रयागराज की श्रृंगार रस की कवयित्री वंदना शुक्ला और देवरिया की गुनगुन गुप्ता ने अपनी भावपूर्ण रचनाओं से श्रोताओं के दिलों को छुआ।मऊ की माटी का मान बढ़ाते हुए वीर रस के कवि पंकज प्रखर और पुरुषार्थ सिंह ने अपनी ओजस्वी एवं भावप्रधान कविताओं से ऐसा समां बांधा कि सभागार देर तक तालियों से गूंजता रहा। कवियों की प्रस्तुतियों में कहीं शौर्य और पराक्रम की गूंज सुनाई दी तो कहीं प्रेम, संवेदना और मानवीय भावनाओं की खूबसूरत अभिव्यक्ति देखने को मिली। मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में भी कविता के प्रति लोगों का उत्साह इस आयोजन में साफ नजर आया।
मंच पर कवि बदलते रहे, अंदाज बदलते रहे, लेकिन श्रोताओं की तालियों और उत्साह की लय अंत तक बरकरार रही। समारोह के समापन अवसर पर उपस्थित सभी पत्रकारों को अंगवस्त्रम और बैग भेंटकर सम्मानित किया गया। पूरे आयोजन को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाने में चंद्रा इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधक विजय बहादुर पाल की विशेष भूमिका रही। पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन युवा ओजस्वी कवि पंकज प्रखर ने अपनी प्रभावशाली वाणी, सधे हुए अंदाज और साहित्यिक समझ से किया। उनकी संचालन शैली ने पूरे आयोजन को शुरू से अंत तक जीवंत बनाए रखा। कुल मिलाकर जहां पत्रकारों को अपनी बात रखने का सशक्त मंच मिला, वहीं कवियों की रचनाओं ने सभागार में साहित्य और संस्कृति की अविस्मरणीय छाप छोड़ी।
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