राकेश सिंह ने उठाई प्लांट-टू-प्लांट सर्वे की मांग, पिछले साल के 297 किसानों की क्षति रिपोर्ट का मामला भी उठाया
मऊ – जिस धान की फसल को किसान महीनों की मेहनत, पसीने और पूंजी से सींचकर घर लाने की तैयारी कर रहे थे, उस पर कुदरत के कहर ने पानी फेर दी। जिले में दो दिनों से हो रही भारी बारिश, आंधी और तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में पककर तैयार धान की फसल गिर गई है, जबकि जलभराव से खड़ी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। कई किसानों के कच्चे मकान भी गिर गए हैं। ऐसे में किसानों को उनकी बर्बाद हुई फसल का मुआवजा कब मिलेगा, यह बड़ा सवाल बन गया है। जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा किसान नेता राकेश सिंह ने बताया कि देर से पकने वाली नाटी मंसूरी (एमटीयू-7029) धान की बालियां जमीन पर गिर गई हैं, जिससे उत्पादन पर करीब 50 प्रतिशत तक असर पड़ने की आशंका है। उनका कहना है कि एक बीघा धान की फसल तैयार करने में किसान को लगभग 15 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। सरसों, मटर, मसूर और आलू की बुवाई वाले खेतों में जलभराव से भी नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रशासन से खेतों में प्लांट-टू-प्लांट सर्वे कराकर वास्तविक क्षति का आकलन कराने की मांग की है गौरतलब है कि उनके अनुसार, पिछले वर्ष मोनथा चक्रवात से रतनपुरा ब्लॉक के 297 किसानों की क्षति रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। इसके बावजूद प्रभावित किसानों को सहायता मिलने का सवाल आज भी बना हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या इस बार भी किसानों की क्षति केवल कागजों में दर्ज होगी या उन्हें वास्तव में मुआवजा मिल पाएगा?




