SGPGI में 3 साल के बच्चे का दुर्लभ आनुवंशिक HoFH बीमारी का सफल इलाज, प्लाज्मा एक्सचेंज से कोलेस्ट्रॉल 70% घटा

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होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया से पीड़ित बच्चे का 20 सप्ताह तक हर सप्ताह किया गया प्लाज्मा एक्सचेंज; प्रत्येक प्रक्रिया के बाद कोलेस्ट्रॉल में औसतन 70 प्रतिशत की कमी

लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI), लखनऊ के चिकित्सकों ने एक दुर्लभ और गंभीर आनुवंशिक बीमारी होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (HoFH) से पीड़ित तीन वर्षीय बच्चे का सफलतापूर्वक उपचार किया है। बच्चे के उपचार के लिए चिकित्सकों ने लगातार सीरियल थेराप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज की विशेष प्रक्रिया अपनाई। यह मामला दुर्लभ आनुवंशिक और जटिल बाल रोगों के उपचार में एसजीपीजीआईएमएस की विशेषज्ञता और उन्नत थेराप्यूटिक अफेरेसिस सेवाओं को दर्शाता है।

HoFH एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें जन्म से ही रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर असामान्य रूप से बहुत अधिक रहता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह बीमारी लगभग पांच लाख लोगों में से किसी एक को प्रभावित करती है। इस बीमारी में शरीर रक्त से हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाता, जिसके कारण कम उम्र में ही शरीर के विभिन्न हिस्सों में कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है।

जन्म से ही बढ़ा रहता है कोलेस्ट्रॉल का स्तर

होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया में शरीर की प्राकृतिक व्यवस्था रक्त में मौजूद हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को पर्याप्त रूप से हटाने में सक्षम नहीं होती। इसके परिणामस्वरूप रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत अधिक बना रहता है।

लंबे समय तक अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल रहने से त्वचा और नसों में कोलेस्ट्रॉल जमा हो सकता है। इसके अलावा हृदय की धमनियों के संकरे होने, हृदय के वाल्व प्रभावित होने और दिल का दौरा पड़ने जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। उपचार न मिलने की स्थिति में यह बीमारी बेहद गंभीर साबित हो सकती है और कुछ मामलों में कम उम्र में ही मृत्यु का कारण बन सकती है।

मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में हुई बीमारी की पहचान

तीन वर्षीय बच्चे की प्रारंभिक जांच एसजीपीजीआईएमएस के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में की गई। जांच के दौरान बच्चे में HoFH की पहचान हुई।

बच्चे के उपचार में सबसे बड़ी चुनौती उसका बेहद कम उम्र का होना और रक्त में लगातार बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल का बना रहना था। आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं अधिक मात्रा में दिए जाने के बावजूद बच्चे का कोलेस्ट्रॉल स्तर करीब 854 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (mg/dL) बना रहा।

इतना अधिक कोलेस्ट्रॉल स्तर सामान्य स्तर की तुलना में कई गुना अधिक था। कुछ अन्य दवाएं बच्चे की कम उम्र के कारण उपयुक्त नहीं थीं, जबकि कुछ उपचार विकल्प परिवार के लिए अत्यधिक महंगे थे।

इन परिस्थितियों में बच्चे को रक्त से अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल निकालने के लिए अफेरेसिस उपचार के लिए एसजीपीजीआईएमएस के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग भेजा गया।

एलडीएल अफेरेसिस के बजाय तैयार किया गया विशेष प्रोटोकॉल

HoFH में एलडीएल अफेरेसिस जैसी अत्यधिक विशिष्ट प्रक्रिया एक उपचार विकल्प हो सकती है, लेकिन इसे लंबे समय तक जारी रखना बेहद महंगा हो सकता है। बच्चे की उम्र, चिकित्सकीय आवश्यकता और उपचार की व्यवहारिकता को ध्यान में रखते हुए एसजीपीजीआईएमएस की टीम ने एक विशेष पीडियाट्रिक थेराप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज प्रोटोकॉल तैयार किया।

इस विशेष प्रक्रिया का उद्देश्य रक्त से कोलेस्ट्रॉल युक्त प्लाज्मा को हटाकर कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करना था।

प्लाज्मा एक्सचेंज के दौरान बच्चे के रक्त को अफेरेसिस मशीन से गुजारा गया। मशीन के माध्यम से रक्त से कोलेस्ट्रॉल युक्त प्लाज्मा को अलग किया गया और उसे बाहर निकाला गया। इसके स्थान पर उपयुक्त प्रतिस्थापन द्रव दिया गया, जबकि रक्त के अन्य उपयोगी घटकों को सुरक्षित रूप से बच्चे के शरीर में वापस पहुंचाया गया।

20 सप्ताह तक हर सप्ताह किया गया प्लाज्मा एक्सचेंज

चिकित्सकों ने बच्चे को 20 सप्ताह तक प्रत्येक सप्ताह ओपीडी आधार पर प्लाज्मा एक्सचेंज की प्रक्रिया से गुजारा। उपचार के दौरान प्रत्येक प्रक्रिया के बाद कोलेस्ट्रॉल स्तर में औसतन लगभग 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि बच्चे ने लगातार की गई इन प्रक्रियाओं को अच्छी तरह सहन किया। उपचार के दौरान कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई।

चिकित्सकों ने बच्चे की स्थिति में केवल रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर के स्तर पर ही सुधार नहीं देखा, बल्कि त्वचा पर दिखाई देने वाले कोलेस्ट्रॉल के जमाव में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।

परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कुछ प्रक्रियाएं निःशुल्क

बच्चे के परिवार की परिस्थितियों और लगातार उपचार की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कुछ प्लाज्मा एक्सचेंज प्रक्रियाएं निःशुल्क भी की गईं।

इससे बच्चे के लिए लंबे समय तक आवश्यक उपचार जारी रखना संभव हुआ। चिकित्सकीय टीम ने बच्चे की उम्र और बीमारी की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उपचार प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया।

भारत में सबसे कम उम्र के रिपोर्ट किए गए मामलों में शामिल

उपचार से जुड़े डॉ. भरत सिंह के अनुसार, यह भारत में HoFH से पीड़ित उन सबसे कम उम्र के रिपोर्ट किए गए बच्चों में से एक है, जिसका लगातार कई प्लाज्मा एक्सचेंज प्रक्रियाओं के माध्यम से उपचार किया गया।

डॉ. सिंह के अनुसार, यह मामला दुर्लभ और जटिल बाल रोगों के उपचार में एसजीपीजीआईएमएस की उन्नत थेराप्यूटिक अफेरेसिस सेवाओं और विशेषज्ञता को दर्शाता है।

तीन वर्ष की बेहद कम उम्र में इतने अधिक कोलेस्ट्रॉल स्तर वाले बच्चे का लंबे समय तक उपचार करना चिकित्सकीय रूप से चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में विशेष रूप से तैयार किया गया पीडियाट्रिक प्लाज्मा एक्सचेंज प्रोटोकॉल महत्वपूर्ण साबित हुआ।

ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की संयुक्त भूमिका

बच्चे के उपचार का समन्वय एसजीपीजीआईएमएस के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के डॉ. भरत सिंह और मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की डॉ. अमिता मोइरांगथेम ने किया।

उपचार में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की प्रो. प्रीति एल्हेंस, प्रो. अनुपम वर्मा और डॉ. अजय जोसेफ का भी योगदान रहा।

इस उपचार में मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की भूमिका बीमारी की पहचान और आनुवंशिक स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण रही, जबकि ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन टीम ने बच्चे के लिए उपयुक्त थेराप्यूटिक अफेरेसिस प्रक्रिया को लागू किया।

समय पर पहचान और उपचार से जटिलताओं को रोका जा सकता है

चिकित्सकों के अनुसार, HoFH जैसी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी की समय पर पहचान और उचित उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बीमारी की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाए और रक्त में अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जाए, तो इससे बीमारी से जुड़ी कई गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद मिल सकती है।

इस मामले में बच्चे के कोलेस्ट्रॉल का स्तर दवाओं के बावजूद बहुत अधिक बने रहने के बाद अफेरेसिस उपचार का विकल्प अपनाया गया। लगातार प्लाज्मा एक्सचेंज के बाद कोलेस्ट्रॉल स्तर में उल्लेखनीय कमी और त्वचा पर जमा कोलेस्ट्रॉल में सुधार दर्ज किया गया।

निदेशक प्रो. आर.के. धीमन ने टीम को दी बधाई

एसजीपीजीआईएमएस के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन ने इस महत्वपूर्ण चिकित्सकीय उपलब्धि की सराहना की और उपचार में शामिल पूरी टीम को बधाई दी।

यह उपलब्धि एसजीपीजीआईएमएस में विभिन्न विशेषज्ञ विभागों के बीच समन्वित प्रयास का उदाहरण भी है। मेडिकल जेनेटिक्स और ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभागों के विशेषज्ञों ने मिलकर बच्चे के लिए उसकी उम्र और बीमारी की गंभीरता के अनुरूप उपचार रणनीति तैयार की।

दुर्लभ बीमारी में उपचार की नई संभावना

तीन वर्षीय बच्चे के इस सफल उपचार ने HoFH जैसे दुर्लभ और गंभीर आनुवंशिक रोगों के प्रबंधन में चिकित्सकीय विकल्पों की संभावनाओं को सामने रखा है। खास तौर पर उन परिस्थितियों में, जब पारंपरिक दवाओं से अपेक्षित नियंत्रण हासिल न हो और अत्यधिक विशिष्ट उपचार लंबे समय तक जारी रखना आर्थिक रूप से कठिन हो।

एसजीपीजीआईएमएस की टीम के अनुसार, इस मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि दुर्लभ आनुवंशिक रोगों में समय पर निदान, विशेषज्ञों के बीच समन्वय और मरीज की आवश्यकता के अनुरूप उपचार प्रोटोकॉल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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