हिंदी के प्रयोग, प्रतिष्ठा और प्रगति को बढ़ावा देने के लिए आयोजित होंगे विविध कार्यक्रम; कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा- हिंदी ज्ञान, संवाद और नवाचार की सशक्त भाषा बने
लखनऊ, 1 सितंबर 2026। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ में 1 से 30 सितंबर 2026 तक ‘राजभाषा हिंदी उत्सव-2026’ मनाया जा रहा है। विश्वविद्यालय के हिंदी प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित किए जा रहे इस एक माह लंबे उत्सव का उद्देश्य हिंदी के प्रयोग, प्रतिष्ठा और प्रगति को बढ़ावा देना है। उत्सव के दौरान विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगिताओं, कार्यशालाओं, संगोष्ठियों और अन्य शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेंगे।
राजभाषा हिंदी उत्सव-2026 के अंतर्गत हिंदी माह के उद्घाटन के साथ विभिन्न विभागों द्वारा हिंदी से जुड़ी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें श्रुतिलेख (सु-लेख), टिप्पणी एवं प्रारूपण, हिंदी टंकण, राजभाषा सामान्य ज्ञान और स्वरचित कविता पाठ जैसी प्रतियोगिताएं शामिल हैं।
इसके अलावा विश्वविद्यालय में सप्त दिवसीय हिंदी कार्यशाला, पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं आनंद मठ पर एक दिवसीय कार्यक्रम, दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा हिंदी पखवाड़ा समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह भी आयोजित किए जाएंगे।
हिंदी के प्रयोग को दैनिक कार्यप्रणाली से जोड़ने पर जोर
राजभाषा हिंदी उत्सव-2026 के आयोजन पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी उत्सव केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि अपनी भाषा, संस्कृति, ज्ञान-परंपरा और राष्ट्रीय अस्मिता के प्रति प्रतिबद्धता को फिर से अभिव्यक्त करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि हिंदी भारत की विराट सांस्कृतिक चेतना की अभिव्यक्ति है और इसने देश की विविधताओं के बीच संवाद, समन्वय तथा सह-अस्तित्व की भावना को लगातार मजबूत किया है। उनके अनुसार राजभाषा हिंदी का संवर्धन केवल हिंदी दिवस या हिंदी पखवाड़े तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हिंदी का प्रयोग दैनिक व्यवहार, कार्यालयीन कार्यप्रणाली, अकादमिक चिंतन, शोध-अनुसंधान और ज्ञान-सृजन में लगातार बढ़ाया जाना आवश्यक है।
कुलपति ने कहा कि कोई भी भाषा तभी जीवंत और प्रभावशाली बनती है, जब उसका प्रयोग जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सहजता और स्वाभाविकता के साथ किया जाए।
भारतीय भाषाओं में ज्ञान सृजन को बताया महत्वपूर्ण
प्रो. मित्तल ने कहा कि भारत आज अपनी ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और भाषायी विविधता के साथ वैश्विक पटल पर नई पहचान बना रहा है। ऐसे समय में भारतीय भाषाओं में ज्ञान के सृजन और उसके प्रसार का विशेष महत्व है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें भी भारतीय भाषाओं में शिक्षा, अनुसंधान और ज्ञान के विस्तार को विशेष महत्व दिया गया है। विश्वविद्यालय भाषा और ज्ञान के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कुलपति के अनुसार, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं का व्यापक उपयोग विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों के लिए ज्ञान तक पहुंच को और अधिक सहज बना सकता है। इसी दिशा में विश्वविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
हिंदी को ज्ञान के लोकतंत्रीकरण की भाषा बनाने पर जोर
प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय सामाजिक न्याय, समानता, ज्ञान और मानवीय गरिमा के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय का प्रयास होना चाहिए कि हिंदी ज्ञान के लोकतंत्रीकरण की भाषा बने।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भाषा में सीखने, सोचने, प्रश्न करने और सृजन करने का अवसर मिलना चाहिए। इसके साथ ही हिंदी के विकास की यात्रा भारतीय भाषाओं के सम्मान और उनके परस्पर सहयोग के साथ आगे बढ़नी चाहिए।
उन्होंने भारतीय भाषायी विविधता को देश की शक्ति बताते हुए कहा कि भारत की भाषायी विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी अद्वितीय सांस्कृतिक शक्ति है।
कार्यालयीन कामकाज से लेकर शोध तक हिंदी के प्रयोग पर जोर
कुलपति ने कहा कि ‘राजभाषा हिंदी उत्सव-2026’ के माध्यम से हिंदी के प्रयोग, प्रतिष्ठा और प्रगति के विभिन्न आयामों पर विचार किया जाएगा। इसके तहत कार्यालयीन कार्यों में सरल एवं सहज हिंदी के प्रयोग, शोध एवं अकादमिक लेखन में हिंदी की संभावनाओं के विस्तार तथा तकनीकी एवं वैज्ञानिक विषयों की अभिव्यक्ति हिंदी में अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल एक विषय तक सीमित देखने के बजाय इसे ज्ञान, रोजगार, नवाचार और सृजन की समर्थ भाषा के रूप में स्थापित करने की आवश्यकता है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी को हिंदी की व्यापक संभावनाओं से परिचित कराने पर भी जोर दिया जाएगा।
युवाओं से सक्रिय भागीदारी का आह्वान
प्रो. मित्तल ने विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से राजभाषा हिंदी उत्सव-2026 में सक्रिय एवं रचनात्मक सहभागिता करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भागीदारी के साथ-साथ अपने कार्यक्षेत्र में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लेना ही इस उत्सव की वास्तविक सार्थकता होगी।
कुलपति ने कहा कि हिंदी को केवल ‘राजभाषा’ के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान, संवाद, संवेदना, सृजन और आत्मविश्वास की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
भारतीय भाषाओं के समग्र विकास से जुड़ा है हिंदी का विकास
कुलपति ने यह भी कहा कि हिंदी का विकास भारतीय भाषाओं की समग्र विरासत को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने हिंदी के विकास को अन्य भारतीय भाषाओं के सम्मान और सहयोग के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उनके अनुसार, भारत की भाषायी विविधता देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सभी भारतीय भाषाओं के बीच सहयोग से ज्ञान और संस्कृति के व्यापक प्रसार को मजबूती मिल सकती है।
महीनेभर चलेगा कार्यक्रमों का सिलसिला
बीबीएयू के हिंदी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस एक माह लंबे उत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताओं और शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों में हिंदी के प्रति रचनात्मक अभिरुचि विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रमों के माध्यम से राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए विश्वविद्यालय समुदाय को प्रेरित किया जाएगा। साथ ही हिंदी को ज्ञान, संवाद, शोध और नवाचार की सशक्त भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
विश्वविद्यालय की ओर से विश्वास व्यक्त किया गया है कि ‘राजभाषा हिंदी उत्सव-2026’ बीबीएयू में हिंदी के प्रति नई ऊर्जा, नई चेतना और नई प्रतिबद्धता का संचार करेगा। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से हिंदी को ज्ञान एवं नवाचार की सशक्त भाषा बनाने की दिशा में सार्थक प्रगति की उम्मीद जताई गई है।




