यात्रियों को राहत देते हुए, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने रविवार सुबह घोषणा की कि सभी नेटवर्क स्टेशन अब खुले और चालू हैं। ऐसा तब हुआ जब राष्ट्रीय राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शनिवार शाम को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हो गया।

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में, डीएमआरसी ने कहा, “दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के सभी स्टेशन यात्री सेवाओं के लिए (प्रवेश और निकास दोनों) खुले हैं।”
पिछले चार दिनों में जो स्टेशन प्रभावित हुए उनमें लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सुप्रीम कोर्ट, सेवा तीर्थ, जनपथ, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय, आईटीओ, नई दिल्ली, दिल्ली गेट, जोर बाग आदि शामिल हैं।
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पिछले सप्ताह सीजेपी का विरोध प्रदर्शन बड़े पैमाने पर आंदोलन में तब्दील होने के कारण लगभग हर दिन लगभग 17-18 स्टेशनों को बंद कर दिया गया था। हालांकि इंटरचेंज सुविधाएं चालू रहीं, लेकिन मध्य दिल्ली में इन स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद होने से कई यात्री प्रभावित हुए।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
राष्ट्रीय राजधानी में छात्रों के कई दिनों के विरोध प्रदर्शन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें “बहुत दुखी” किया है और यह मुद्दा “व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है।”
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सीजेपी ने विरोध वापस लिया
प्रधान के इस्तीफे के बाद, अभिजीत डुबके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना विरोध प्रदर्शन बंद कर दिया और घोषणा की कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस लेने और एनईईटी पेपर लीक के बाद कथित तौर पर आत्महत्या से मरने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे सहित उनकी अन्य मांगों को स्वीकार कर लिया है।
प्रतियोगी परीक्षाओं, मुख्य रूप से एनईईटी में कथित अनियमितताओं पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी एक महीने से अधिक समय से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही थी।
आंदोलन 20 जून को दिल्ली के जंतर मंतर पर शुरू हुआ। कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून को विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की। 23 जुलाई की देर रात वांगचुक ने केंद्र की ओर से संपर्क करने के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया।
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नया पेपर लीक बिल
पेपर लीक के खिलाफ एक नए विधेयक में कड़ी सजा, न्यूनतम जेल अवधि और जुर्माने की मात्रा में बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है। यह फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करके त्वरित सुनवाई का भी वादा करता है।
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित कानून के अनुसार, “अनुचित तरीकों और अपराधों” का सहारा लेने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम पांच साल की कैद की सजा दी जाएगी, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है और पचास लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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