नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि “भारत चल रहे युद्ध को समाप्त कर सकता है”।नागपुर में एक सभा में बोलते हुए भागवत ने कहा कि विभिन्न देशों की आवाजें शांति को बढ़ावा देने में भारत की भूमिका को पहचान रही हैं।भागवत ने कहा, “कई देश कह रहे हैं कि केवल भारत ही चल रहे युद्ध को समाप्त कर सकता है।”भागवत विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के विदर्भ प्रांत कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने वैश्विक संघर्षों के मूल कारणों और सद्भाव की ओर बदलाव की आवश्यकता के बारे में भी बात की।
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में युद्धों के पीछे स्वार्थ और प्रभुत्व की चाहत ही मुख्य कारण है। भागवत ने कहा, “युद्ध स्वार्थ का परिणाम है; दुनिया को सद्भाव की जरूरत है, संघर्ष की नहीं।”व्यापक संदर्भ प्रदान करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया ने लगभग 2,000 वर्षों से संघर्षों को हल करने के लिए विभिन्न तरीकों की कोशिश की है, लेकिन कई चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और श्रेष्ठता और हीनता के विचार मौजूद हैं।भागवत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत का पारंपरिक दर्शन एकता और परस्पर जुड़ाव को बढ़ावा देता है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, उन्होंने कहा कि भारतीय सोच इस विचार पर आधारित है कि हर कोई जुड़ा हुआ है और यहां तक कि आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इस समझ की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्थायी शांति सत्ता संघर्षों से नहीं, बल्कि एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से हासिल की जा सकती है। उनके अनुसार धर्म केवल शास्त्रों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि दैनिक आचरण में प्रतिबिंबित होना चाहिए।भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों के बीच अंतर बताते हुए भागवत ने कहा, “भारत मानवता के कानून का पालन करता है, अन्य लोग योग्यतम के जीवित रहने में विश्वास करते हैं।”भागवत ने कहा कि दुनिया में संतुलन बहाल करने में मदद करना भारत की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “भारत के लोग मानवता के कानून का पालन करते हैं, लेकिन बाकी दुनिया जंगल के कानून का पालन करती है। लड़खड़ाती दुनिया को धर्म की नींव देकर संतुलन बहाल करना हमारा काम है।”
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