सरोजनीनगर (लखनऊ)। यूजीसी के नए प्रस्तावित कानून “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशन्स, 2026” के विरोध में रविवार को राजधानी लखनऊ के सरोजनीनगर क्षेत्र में सवर्ण युवा महासभा के बैनर तले जोरदार धरना-प्रदर्शन एवं पदयात्रा आयोजित की गई। स्कूटर इंडिया चौराहे से विधानसभा चलो का आवाहन करते हुए बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग एकत्रित हुए।
सवर्ण युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील शुक्ला ने कहा कि नए यूजीसी कानून से सवर्ण समाज में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। उनका आरोप है कि इस कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग कर सवर्ण समाज के बच्चों के उच्च शिक्षा में भविष्य को प्रभावित किया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि जिस प्रकार एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग की घटनाएं सामने आई हैं, उसी तरह यह कानून भी सवर्ण समाज के विरुद्ध हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
पदयात्रा के दौरान नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ता विधानसभा की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें सरोजनीनगर थाना के पास बैरिकेडिंग कर रोक लिया। मौके पर एसीपी कृष्णा नगर रजनीश वर्मा, प्रभारी निरीक्षक राजदेव प्रजापति सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा। विधानसभा तक न पहुंच पाने से आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और पुलिस के साथ हल्की नोकझोंक भी हुई।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से विधानसभा के एक बड़े पोस्टर की आरती उतारी और बाद में एसीपी कृष्णा नगर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने के बाद सुशील शुक्ला ने कहा कि सवर्ण समाज के जनप्रतिनिधियों से उम्मीद थी कि वे इस मुद्दे पर आवाज उठाएंगे, लेकिन चुप्पी निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में बैठे सवर्ण नेताओं की “बुद्धि शुद्धि” के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई है।
महिलाओं की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहीं नीता पांडे ने मीडिया से कहा कि यह कानून समाज को आपस में बांटने वाला है। उन्होंने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री मातृत्व और नारी सम्मान की बात करते हैं, तब ऐसा कानून लाना, जो बच्चों को आपस में लड़ाने का कारण बने, बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने आरोप लगाया कि समानता के नाम पर समाज में भय फैलाया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में विभिन्न जातियों के छात्र सौहार्दपूर्ण वातावरण में साथ पढ़ते-लिखते और रहते हैं, लेकिन इस कानून से जातिगत विभाजन को बढ़ावा मिलेगा। नए संशोधन में एससी-एसटी, ओबीसी और महिलाओं को शामिल कर सवर्ण वर्ग को बाहर रखने से भेदभाव की आशंका और बढ़ गई है। उन्होंने इसे सवर्ण वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा से दूर रखने की साजिश बताया।
कार्यक्रम में संजय सिंह (पूर्व जिला अध्यक्ष भाजपा), शिव कुमार सिंह चाचू, अर्जुन सिंह (प्रदेश अध्यक्ष), वीरेंद्र सिंह, अनिल सिंह (राष्ट्रीय संयोजक), दिनेश शुक्ला, प्रफुल्ल दुबे, रेखा तिवारी, विमल तिवारी, नीता पांडे, अर्चना शुक्ला, अल्पना अग्निहोत्री, सीमा रावत, अंजू रावत सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
सवर्ण युवा महासभा ने सरकार से मांग की है कि यूजीसी के इस नए कानून को पूर्णतः वापस लिया जाए, ताकि समाज में समानता, समरसता और सामाजिक सौहार्द बना रह सके।
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