घरेलू शेयर बाजार में वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की सतर्कता के बीच उतार-चढ़ाव का माहौल रहा। बैंकिंग और आईटी शेयरों ने कुछ राहत दी, जबकि कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल और केंद्रीय बैंक की नीतियां निवेशकों की धारणा प्रभावित करती रहीं।