इन्क्यूबेशन, इनोवेशन और उद्यमिता की संभावनाओं से रूबरू हुए विद्यार्थी
लखनऊ, 31 अगस्त 2026। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ के विद्यार्थियों को अब कक्षा की पढ़ाई के साथ-साथ स्टार्टअप और उद्यमिता की दुनिया को करीब से समझने का अवसर भी मिल रहा है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC), सांख्यिकी विभाग तथा सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (CIIE) के संयुक्त तत्वावधान में ‘नवकल्पना—बीबीएयू फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप’ के तहत विद्यार्थियों के लिए फील्ड एवं एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया गया।
‘एंटरप्रेन्योरशिप एवं स्टार्टअप’ विषय पर आयोजित इस विजिट का उद्देश्य विद्यार्थियों को इन्क्यूबेशन यूनिट की कार्यप्रणाली, नवाचार की संभावनाओं और एक विचार को सफल स्टार्टअप में बदलने की प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी देना था। कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के निर्देशन में आयोजित हुआ।
फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने जाना कि किसी नए विचार को व्यवसायिक रूप देने के लिए केवल रचनात्मक सोच ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समस्या की पहचान, समाधान विकसित करने, अवसर तलाशने, मार्गदर्शन प्राप्त करने और सही रणनीति के साथ उसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में नवकल्पना के कंसल्टेंट प्रो. मनोज जोशी, इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल एवं CIIE के अध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा, स्कूल ऑफ फिजिकल एंड डिसीजन साइंस के संकायाध्यक्ष प्रो. सुरिंदर कुमार, नवकल्पना की इन्क्यूबेटर मैनेजर श्रीमती मधुलिका तथा कार्यक्रम संयोजक डॉ. राहुल वार्ष्णेय प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
इस दौरान प्रो. मनोज जोशी, प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा और प्रो. सुरिंदर कुमार ने विद्यार्थियों को नवाचार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने विचारों को केवल सोच तक सीमित न रखते हुए उन्हें व्यावहारिक समाधान और संभावित स्टार्टअप में बदलने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।
नवकल्पना की इन्क्यूबेटर मैनेजर श्रीमती मधुलिका ने विद्यार्थियों को इन्क्यूबेशन यूनिट के उद्देश्यों और उद्यमिता की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, समस्या-समाधान की क्षमता और अवसरों की पहचान विकसित करना समय की जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों से नए विचारों को पहचानने और उन्हें व्यवहारिक रूप देने की दिशा में लगातार प्रयास करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. राहुल वार्ष्णेय ने कहा कि फील्ड विजिट विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यमिता की वास्तविक दुनिया को समझने का व्यावहारिक अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों को अपने नए विचारों को विकसित करने और उन्हें स्टार्टअप के रूप में आगे बढ़ाने के लिए आत्मविश्वास प्रदान करती हैं।
फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने यह भी समझा कि इन्क्यूबेशन सुविधाएं किस तरह नए विचारों को आकार देने और संभावित उद्यमियों को मार्गदर्शन, सहयोग एवं आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में उद्यमिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ रचनात्मक सोच, अवसर पहचानने की क्षमता और आत्मविश्वास को भी मजबूत किया।
इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों को पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे बढ़कर उद्यमिता को भी एक संभावित और प्रभावी करियर विकल्प के रूप में देखने की प्रेरणा मिली।
कार्यक्रम में सांख्यिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुभाष कुमार यादव, प्रो. मधुलिका दुबे, डॉ. अमित कुमार मिश्रा, डॉ. मीनाक्षी मिश्रा, डॉ. प्रयास शर्मा सहित अन्य शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।




