“खौफ नहीं, कलम और मेडल हो युवाओं की पहचान” – शक्ति सिंह
मऊ- रविवार। मऊ की राजनीति में अब पारिवारिक रिश्तों के दावों और विकास की सियासत को लेकर नई चर्चा छिड़ गई है। भाजयुमो की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में लगातार दूसरी बार जिम्मेदारी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एवं दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) पूर्व अध्यक्ष शक्ति सिंह ने अब्बास अंसारी के पारिवारिक संबंधों वाले बयान को खारिज करते हुए जनता के प्रति जवाबदेही को अधिक महत्वपूर्ण बताया। अब्बास अंसारी ने शक्ति सिंह के साथ अपने पारिवारिक रिश्ते अच्छे होने की बात कही थी। इसके जवाब में शक्ति सिंह ने इस दावे को पूरी तरह नकार दिया। उनके रुख से साफ है कि वह मऊ की राजनीति को रिश्तों के दावों के बजाय काम, चरित्र और विकास के मुद्दों पर केंद्रित देखना चाहते हैं। शक्ति सिंह ने कहा कि मऊ की पहचान अब भय और मुकदमों से नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, खेल और सम्मान से होनी चाहिए। वर्ष 2005 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने जिले को पुरानी छवि से बाहर निकालने और युवाओं को बेहतर अवसर देने की जरूरत बताई। अपनी शैक्षिक, विधिक और संगठनात्मक यात्रा का हवाला देते हुए शक्ति सिंह ने कहा कि पहचान विरासत से नहीं, बल्कि संघर्ष और उपलब्धियों से बनती है। उनका संकल्प है कि मऊ के युवाओं के हाथों में खौफ नहीं, कलम और मेडल हों तथा जिले को विकास और सुशासन की नई पहचान मिले। अब सवाल यह है कि मऊ की सियासत में रिश्तों की बहस पर विराम लगाकर विकास के मुद्दे कितनी मजबूती से आगे आते हैं।




