मऊ- भारतीय सेना में 28 वर्षों तक राष्ट्र की सेवा करने के बाद सेवानिवृत्त हुए जनपद के ग्राम मुसरदह निवासी सूबेदार दिग्विजय कुमार का अपने पैतृक गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। फूल-मालाओं, जयघोष और सम्मान समारोह के बीच लोगों ने अपने वीर सपूत का अभिनंदन करते हुए उनके सैन्य योगदान को नमन किया। सूबेदार दिग्विजय कुमार जुलाई 1998 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। भर्ती के तुरंत बाद उनकी पहली तैनाती कारगिल सेक्टर में हुई, जहां भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध चल रहा था। उन्होंने बताया कि कैप्टन बी.के. बत्रा के नेतृत्व में उन्होंने दुश्मनों के खिलाफ मोर्चा संभाला और कारगिल विजय में अपना योगदान दिया। इस दौरान उनके कई साथी सैनिक देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए, जिनकी स्मृतियां आज भी उन्हें भावुक कर देती हैं।उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध उनके सैन्य जीवन का सबसे बड़ा अनुभव रहा। इस युद्ध ने उन्हें विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ डटे रहने की सीख दी। यही अनुभव आगे चलकर ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन पराक्रम, ऑपरेशन मेघदूत और ऑपरेशन रेनो जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में उनकी सफलता का आधार बना। पत्रकारों द्वारा पूछे गए अग्निवीर योजना पर उन्होंने कहा कि यह युवाओं के लिए एक सकारात्मक और दूरदर्शी पहल है। इससे युवाओं को सेना में सेवा करने का अवसर मिलने के साथ अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और कौशल का विकास होता है, जिसका लाभ उन्हें भविष्य में अन्य क्षेत्रों में भी मिलता है। सेवानिवृत्ति के बाद गांव पहुंचने पर शौर्य सैनिक संगठन के अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों ने उन्हें अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ इंद्रविजय, डॉ मृत्युंजय, चन्द्रविजय, रणविजय, प्रमोद कुमार, कलावती देवी, प्रमिला, अशोक कुमार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और ग्रामीण उपस्थित रहे।





