भारत ने दोहराया है कि सिंधु जल संधि पर उसकी स्थिति अपरिवर्तित बनी हुई है, जो भविष्य में समझौते की किसी भी बहाली को सीमा पार आतंकवाद के अंत से जोड़ता है। यह बयान पाकिस्तान द्वारा उस चेतावनी के बाद आया है कि संधि को निलंबित करना “पानी का हथियारीकरण” है और इससे क्षेत्रीय तनाव गहरा सकता है। नई दिल्ली का कहना है कि 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि स्थगित है, जबकि इस्लामाबाद इसके पुनरुद्धार का आग्रह कर रहा है। क्या दशकों पुराना जल-बंटवारा समझौता अब दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच एक और बड़ा टकराव बन रहा है?
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