
अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और उल्लस (अंडरस्टैंडिंग लाइफलॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी) कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। यह विकास राज्य के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा निर्धारित वयस्क साक्षरता मानकों को पूरा करने के बाद राज्य ने यह दर्जा हासिल किया। इसके बाद राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरुमीत सिंह ने उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
उत्तराखंड से पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम पहले ही पूर्ण साक्षरता का दर्जा हासिल कर चुके थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को राज्य के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि लोगों की सक्रिय भागीदारी और साक्षरता में सुधार के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण सफलता संभव हुई।
उत्तराखंड के लोगों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी उपलब्धियां भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य के करीब पहुंचने में मदद करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए काम करना जारी रखेगी कि डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, सतत शिक्षा और जीवन कौशल हर नागरिक तक पहुंचें।
उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने 19 जून को राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। अधिकारियों के अनुसार, राज्य की साक्षरता दर अब 98 प्रतिशत से अधिक है, जिससे यह देश के सबसे साक्षर राज्यों में से एक बन गया है।




