नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने उन रिपोर्टों पर सवाल उठाया कि केंद्र विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक को वापस ले सकता है, उन्होंने कहा कि इस कदम पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता है।हाल ही में नीलांबुर में बोलते हुए थरूर ने कहा, “केंद्र द्वारा एफसीआरए संशोधन विधेयक को वापस लेने की रिपोर्ट पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता है। केंद्र सरकार जिस तत्परता से एफसीआरए में बदलाव लाने का प्रयास कर रही है, उसे समझना मुश्किल है। 16 तारीख को संसद फिर से शुरू होने पर विधेयक को फिर से पेश किए जाने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष सतर्क रहेगा, “विपक्ष धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच चिंता पैदा करने वाले किसी भी संशोधन को पारित नहीं होने देगा।”उनकी टिप्पणी विपक्षी सांसदों द्वारा संसद में मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन करने के एक दिन बाद आई है, जिसमें मांग की गई है कि विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलाव एनजीओ और धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों के बीच अनिश्चितता और चिंता पैदा कर सकते हैं।विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026, 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। हालांकि विधेयक को बुधवार के लोकसभा एजेंडे में विचार के लिए सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन इसे चर्चा के लिए नहीं लिया गया।यह विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन करना चाहता है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य भारत में प्राप्त विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।
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