नई दिल्ली: लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) पर चर्चा के लिए सत्तारूढ़ भाजपा की आलोचना करते हुए विपक्ष ने सोमवार को पूछा कि मोदी सरकार संसद में पश्चिम एशिया युद्ध, हिंदुत्व के नाम पर “उग्रवाद”, बढ़ती बेरोजगारी और दलितों और कमजोर वर्गों के खिलाफ बढ़ते अत्याचार जैसे मुद्दों पर चर्चा क्यों नहीं कर रही है। कई वक्ताओं ने चेतावनी दी कि आदिवासी क्षेत्रों में खनिज संसाधनों के दोहन के लिए कॉरपोरेट्स को समर्थन देने से स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा हो सकती है, जो शोषण के साथ-साथ नक्सली समस्या की जड़ है।कांग्रेस सांसद सप्तगिरि उलाका ने कहा कि भाजपा ने माओवादी हिंसा में किसी सदस्य को नहीं खोया, जैसे उसने स्वतंत्रता संग्राम में किसी को नहीं खोया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने नक्सलियों से लड़ाई लड़ी है और झीरम घाटी नरसंहार में पूरे छत्तीसगढ़ पार्टी के नेताओं की तरह अपने सदस्यों को भी खोया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 31 मार्च की समय सीमा कुछ कॉरपोरेट्स के हितों से जुड़ी हुई प्रतीत होती है, जिसका उल्लेख कई अन्य विपक्षी सांसदों ने किया है।
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