लखनऊ के प्रतिष्ठित PGI संस्थान में एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर दो महीने तक न्याय के लिए सिस्टम से लड़ती रही, लेकिन उसे इंसाफ के बदले केवल तारीखें और धमकियां मिलीं। आरोपी रेजिडेंट द्वारा शारीरिक शोषण, मारपीट और जातिसूचक गालियों से तंग आकर पीड़िता ने आत्महत्या का प्रयास तक किया, फिर भी पुलिस और विशाखा कमेटी मौन रही। जानिए कैसे एक डॉक्टर को रसूख और पुलिसिया लापरवाही ने नशे और अवसाद की गर्त में धकेल दिया, और 60 दिनों की जद्दोजहद के बाद आखिर कैसे दर्ज हुई FIR।
Tag: workplace harassment
बाराबंकी के स्कूल शिक्षक प्रिंसिपल कार्यालय में मृत पाए गए, परिजनों ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न का आरोप लगाया
पुलिस ने बताया कि शनिवार को बाराबंकी जिले के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के प्रिंसिपल कार्यालय के अंदर एक 40 वर्षीय महिला शिक्षक मृत पाई […]