लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत, पुलिसिंग को आधुनिक बनाने और इसे अधिक परिणामोन्मुख बनाने के लिए उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, लखनऊ में अपराध स्थल विशेषज्ञों का बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण चल रहा है।

यूपी सरकार ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि पांच चरणों में 500 विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने की योजना पर काम तेजी से चल रहा है।
अब तक 300 विशेषज्ञों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और शेष दो बैच जल्द ही अपना प्रशिक्षण पूरा कर लेंगे।
इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि ये प्रशिक्षित अधिकारी अन्य पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए अपने संबंधित आयुक्तालयों और जिलों में लौट आएंगे। बयान में कहा गया है कि इस तरह, ये यूपीएसआईएफएस-प्रशिक्षित विशेषज्ञ फोरेंसिक पुलिसिंग की एक मजबूत राज्यव्यापी श्रृंखला बनाने में मदद करेंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में, वे कांस्टेबल से लेकर निरीक्षकों तक के कर्मियों को अपराध स्थल प्रबंधन, साइबर फोरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण और वैज्ञानिक जांच के बारीक पहलुओं में प्रशिक्षित करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे, जिससे पुलिस बल की समग्र दक्षता में महत्वपूर्ण सुधार होगा।
बयान में कहा गया है कि प्रशिक्षण के दौरान, अधिकारियों को न केवल पारंपरिक जांच तरीकों से बल्कि डिजिटल साक्ष्य संरक्षण, साइबर ट्रैकिंग, वैज्ञानिक नमूनाकरण और फोरेंसिक विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों से भी लैस किया जाता है।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि अधिकारियों के पहुंचते ही अपराध स्थल के हर पहलू को सटीक रूप से सुरक्षित किया जा सके और उसका विश्लेषण किया जा सके।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी के अनुसार, पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को तकनीकी विशेषज्ञता से लैस करते हुए फोरेंसिक विशेषज्ञों के तीन बैचों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है।
चौथा बैच 27 अप्रैल को शुरू होगा, उसके बाद पांचवें चरण में शेष सभी विशेषज्ञों का प्रशिक्षण पूरा होगा। बयान में कहा गया है कि ये विशेषज्ञ राज्य के सभी आयुक्तालयों और 75 जिलों में अधिकारियों को प्रशिक्षित करेंगे।
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