मऊ- मधुबन। गांव की चौपालों पर अभी चुनाव की तारीख भले दूर हो, लेकिन मधुबन की सियासी बिसात पर मोहरे चलने लगे हैं। रविवार को पांती रोड स्थित गांधी मैदान में आयोजित बसपा सम्मेलन में भाजपा के पुराने चेहरे और क्षेत्र में करीब 17 साल से सक्रिय रहे भरत सिंह उर्फ भरत भैया ने अपने समर्थकों के साथ भाजपा को अलविदा कहकर बसपा का हाथ थाम लिया। बसपा के पूर्वांचल प्रभारी व पूर्व एमएलसी दिनेश चंद्रा तथा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इसके साथ ही दिनेश चंद्रा ने भरत भैया को मधुबन विधानसभा का प्रभारी प्रत्याशी घोषित कर दिया। भरत भैया वर्ष 2009 से मधुबन को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बताते रहे हैं। गांव-गांव जनसंपर्क और स्थानीय समस्याओं को लेकर सक्रिय रहने वाले भरत भैया ने भाजपा छोड़ने की वजह टिकट को लेकर अपनी नाराजगी को बताया। उनका आरोप है कि लंबे समय तक जमीन पर काम करने के बावजूद पिछले आठ वर्षों से लगातार विधानसभा चुनाव में उन्हें मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि आज राजनीति में पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं के बजाय बाहरी चेहरों, वंशवाद और धनबल को अधिक तरजीह दी जा रही है। उनका कहना है कि कोरोना, बाढ़, बिजली और सड़क जैसी समस्याओं के समय भी वह जनता के बीच रहे और जनसेवा में अपनी पारिवारिक कमाई तक खर्च की। भरत भैया के बसपा में जाने से मधुबन की सियासी चौपालों पर चर्चा गर्म है। असली सवाल अब यह है कि उनके साथ दिखी भीड़ में से कितने चेहरे मतदान के दिन बूथ तक पहुंचेंगे। जातीय समीकरण, गांव की गोलबंदी और पुराने राजनीतिक रिश्तों के बीच यह बदलाव कितना असर डालेगा, यह आने वाला वक्त बताएगा।फिलहाल इतना तय है कि 2027 का चुनाव अभी दूर है, मगर मधुबन में सियासी हलचल ने दस्तक दे दी है।
मधुबन में बदली सियासी हवा, भरत भैया ने भाजपा छोड़ी, बसपा का थामा हाथ टिकट की उपेक्षा का लगाया आरोप, समर्थकों संग बसपा में शामिल; मधुबन से प्रभारी प्रत्याशी घोषित






